बेड़ीनाग (पिथौरागढ़)। लोकगायक पप्पू कार्की के गीत और सुर पहाड़ की लोक संस्कृति में रच बस गए हैं। लोक गीतों का शौकीन कोई अपवाद ही होगा जो उनके गीतों को गुनगुनाता न हो। यहां तक की जनपद के कई स्कूल कालेजों में उनके सुपर हिट गीत ‘सुण ले दगड़िया, बात सुणिले..’ की तर्ज में बनाई गई कुमाऊंनी सरस्वती वंदना ‘दैणी है जाए, मां सरस्वती..’ प्रार्थना सभा में गाई जा रही है।
सरकारी विद्यालयों में स्थानीय बोली भाषा की प्रार्थना को स्थान देने के आदेश के बाद से बालिका इंटर कॉलेज में पिछले दो माह से सप्ताह में दो दिन यह वंदना गाई जा रही है। बुधवार को कालेज में प्रार्थना शुरू होते ही सबके जेहन में पप्पू कार्की के गीत की धुन कौंध गई। बाद में दिवंगत लोकगायक पप्पू कार्की को श्रद्धांजलि दी गई। कालेज की प्रधानाचार्या ऊषा पंत ने बताया कि स्थानीय बोली की प्रार्थना को शामिल करने के बाद कालेज की अध्यापिका हिमानी बोरा को इसकी जिम्मेदारी दी गई।
डाइट डीडीहाट की कार्यशाला में तैयार हुई प्रार्थना
बेड़ीनाग। कुमाऊंनी बोली की यह प्रार्थना डीडीहाट के शिक्षक सत्यम जोशी ने पप्पू कार्की के गीत ‘सुण ले दगड़िया, बात सुणिले..’ की तर्ज में तैयार की थी। कुछ माह पूर्व डाइट डीडीहाट में प्रार्थना सभा की कार्यशाला में इसे सदानंद भट्ट और डॉ. सीबी जोशी के निर्देशन में परिमार्जित किया गया था। यह कुमाऊंनी प्रार्थना अब कई स्कूलों में गायी जाने लगी है।