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कैंसर जैसी बड़ी बीमारी, महकमे की अधूरी तैयारी

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पिथौरागढ़। कैंसर जैसी बड़ी बीमारी से निपटने के लिए जिले में महकमे की तैयारी अधूरी नजर आ रही है। इस रोग के निवारण और नियंत्रण के लिए गठित एनपीसीडीसीएस सेल शुरुआत से ही कार्मिकों की कमी से जूझता आया है।
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दो दिन पहले तीन पदों पर हुई नियुक्तियों से पहले सेल का कामकाज एक डाटा एंट्री ऑपरेटर के जिम्मे था। नोडल अधिकारी के जिम्मे दो और प्रभार हैं। प्राथमिक इलाज के लिए डे-केयर सेंटर तो दूर जांच तक की सुविधा नहीं है। इस सेल की भूमिका महज रोगियों की रिर्पोटिंग और प्रचार-प्रसार के दावों तक ही सीमित है। ऐसे में गैर संक्रामक रोग निवारण एवं नियंत्रण कार्यक्रम के तहत चल रही कवायद रस्म अदायगी बनकर रह गई है।

जिले में हर माह औसतन छह संदिग्ध कैंसर रोगी रिपोर्ट हो रहे हैं। यानी हर पांचवें दिन एक संदिग्ध कैंसर रोगी। अप्रैल 2017 से अब तक जिले में कैंसर के 60 संदिग्ध पीड़ित रिपोर्ट हो चुके हैं। इनमें 50 महिलाएं शामिल हैं। महिलाओं में स्तन, बच्चेदानी का कैंसर, जबकि पुरुषों में सर्वाइकल एवं अन्य तरह के कैंसर के लक्षण पाए गए। इसके इतर केंद्र सरकार के कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य महकमे की तैयारी हैरान-परेशान करने वाली है। वर्ष 2015 में सेल की स्थापना होनी थी, लेकिन यहां पिछले वर्ष ही सेल गठित किया गया।
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यह सेल दो दिन पहले तक महज एक डॉटा एंट्री ऑपरेटर के हवाले चल रहा था। पहली फरवरी को ही फाइनेंशियल कम लॉजिस्टिक कंसल्टेंट, लैब टेक्नीशियन, फिजियोथेरेपिस्ट की नियुक्ति हुई है। जिला अस्पताल में बनाया गया क्लीनिक महज दो नर्स और एक डाटा एंट्री ऑपरेटर के भरोसे चल रहा है। नाम के इस क्लीनिक में जांच या प्राथमिक इलाज की सुविधा नहीं है।

क्लीनिक की भूमिका महज रिपोर्टिंग तक सीमित है। सेल के नोडल अधिकारी के पास केंद्रीय औषधि भंडार, एनएचएम का अतिरिक्त प्रभार भी है। इन व्यस्त प्रभारों के चलते नोडल अधिकारी सेल को पूरा समय नहीं दे पाते हैं। इन हालातों को देखते हुए महकमे के स्तर पर जन जागरूकता की बात करना ही बेमानी है। अब तक कोई भी गैर सरकारी संगठन कैंसर की मुहिम में महकमे के साथ नहीं आया है।

संदिग्ध रोगियों की नहीं हो रही ट्रेकिंग
अब तक मिले सभी संदिग्ध रोगियों को हल्द्वानी, बरेली या दिल्ली हायर सेंटर रिफर किया गया, लेकिन इसके बाद संदिग्धों के फॉलोअप या ट्रेकिंग की व्यवस्था नहीं है। सेल के पास संदिग्ध रोगियों के नाम और संख्या के अलावा कोई जानकारी नहीं है। इन्होंने कहां इलाज कराया, किस-किस संदिग्ध में कैंसर की पुष्टि हुई, रोगी की वर्तमान हालत की सेल को कतई भी जानकारी नहीं है।

ज्यादा हो सकती है रोगियों की संख्या
जिले में रिपोर्ट हो चुके संदिग्ध कैंसर रोगियों की संख्या और ज्यादा हो सकती है। जिला अस्पताल के अलावा मुख्यालय में 10 बड़े निजी अस्पताल भी हैं। रोगियों के निजी अस्पतालों का रुख करने की पूरी संभावना हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के पास निजी अस्पताल के रोगियों की कोई जानकारी नहीं है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कुछ समय पहले निजी अस्पतालों से इस संबंध में जानकारी मांगी थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

सेल अभी शुरुआती अवस्था में है। स्टाफ की कमी और दूसरे प्रभार के कार्यों में व्यस्तता के चलते सेल को पूरा समय दे पाना संभव नहीं। व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है। जिला अस्पताल के अलावा सीएससी, पीएससी के माध्यम से लोगों को कैंसर के प्रति जागरूक करने की कोशिश की जा रही है। -डॉ राजेश ढकरियाल, नोडल अधिकारी, एनपीसीडीसीएस, पिथौरागढ़
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