पिथौरागढ़। संस्कृत पुस्तकालय मंजरीकुंज की काव्य गोष्ठी में कवियों ने सामाजिक मुद्दों को उठाया। गोष्ठी में लक्ष्मी आर्या ने कहा-मां एक बार आ जाओ, आओगी तो फिर कभी न जाओगी। डॉ. आनंदी जोशी ने मानवीय कमजोरियों पर कुछ यूं कहा-मानव जीवन पाकर भी हम, प्रेम से रहना सीख न पाए, बन सहिष्णु निस्काम भाव से, सुख-दुख सहना सीख न पाए। कवयित्री आशा सौन ने कहा रातभर पड़े-पड़े सपने मर गए, सुबह हुई हरकत पे आई, हाथों को टटोल कुछ काम दिया, शाम होते-होते सारे सपने पूरे हो गए। रेखा जोशी ने कहा मुझे चाहिए समाज में ऐसे परिवार कम से कम दस-बार, जिस परिवार में हों कम से कम बेटियां दो-चार। गुंजन तिवारी जोशी ने कहा-अजन्मा भ्रूण जीवन हुआ लाचारित, होगा जन्म, या इस भी कर दिया जाएगा मृत घोषित। हेमा थलाल ने कहा बार-बार हो जन्म हमारा, हो ऐसे कर्म हमारा, भारत भूमि हो धर्म हमारा। बाल कवि मनीष जोशी ने कहा मुझ से परिचय नहीं तुम्हारा, मुझ से तुम अनजान हो, बालक तुम महान हो। डॉ. पीतांबर अवस्थी ने कहा भ्रष्टाचार का असुर, अब अपराधों को बढ़ा रहा, कहीं मिलावट, कहीं लूटमार, सब होते सब देख रहा। मंजुला अवस्थी, जया लोहनी आदि थे। कवि प्रकाश जोशी की अध्यक्षता में युवा कवयित्री हेमा थलाल ने संचालन किया।