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डीडीहाट के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की कमी

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डीडीहाट (पिथौरागढ़)। डीडीहाट के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को प्रथम रेफर केंद्र (एफआरसी) के रूप में मान्यता दी गई है। क्षेत्र के किसी भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से सबसे पहले मरीज को डीडीहाट अस्पताल के लिए रेफर करने की व्यवस्था बनाई गई थी, ताकि मरीज को यहां पर इलाज दिया जा सके पर इस अस्पताल में डॉक्टरों से अधिकतर पद रिक्त होने के कारण इसमें रेफर होने वाले मरीज को नहीं लाया जाता।
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मानक के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक प्रभारी के साथ, सर्जन, महिला चिकित्सक को मिलाकर कुल सात डॉक्टरों का स्टाफ होना चाहिए, लेकिन इस समय यहां पर सिर्फ दो डॉक्टर काम कर रहे हैं। इनमें से एक डॉक्टर एनआरएचएम के तहत तैनात हैं और दूसरे डॉक्टर दंत रोग विशेषज्ञ हैं। अस्पताल में फिजीशियन, सर्जन का पद लंबे समय से खाली है। ढाई वर्ष से इस अस्पताल में महिला डॉक्टर नहीं है। करीब साठ हजार की आबादी को सुविधा देने के लिए खोले गए इस अस्पताल में एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, पैथालॉजी की कोई सुविधा नहीं है।

महिला डॉक्टर न होने से गर्भवती महिलाओं को नियमित चेकिंग की कोई सुविधा नहीं मिल पाती। अस्पताल के लिए शासन ने भव्य भवन तैयार तो कर दिया, लेकिन उसमें किसी प्रकार की सुविधा देने के बारे में विचार तक नहीं किया। अस्पताल में रोजाना 80 से 100 मरीज पहुंचते हैं। गंभीर रोगियों को तो सीधे जिला अस्पताल ले जाना पड़ता है। अस्पताल के चिकित्सक डॉ. बीएस मेहरा का कहना है कि डॉक्टरों की कमी से दिक्कत आती है। कभी यदि बड़े हादसे हो जाएं तो उस स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल के पास संसाधन नहीं हैं।
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किसी सरकार ने ध्यान नहीं दिया
सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश बोरा का कहना है कि राज्य गठन के 17 वर्ष बाद भी पहाड़ की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार न आना गंभीर चिंता का विषय है। वह कहते हैं कि राज्य गठन के पीछे स्वास्थ्य, शिक्षा की मंशा रही थी, लेकिन किसी भी सरकार ने इस मंशा को पूरा नहीं किया। राज्य गठन से पहले तो स्वास्थ्य सेवाएं ठीक थी, लेकिन अब स्थिति चिंता में डालने वाली है।

महिला डॉक्टर न होने से दिक्कत
डीडीहाट निवासी गंगा खड़ायत का कहना है कि महिला डॉक्टर न होने से गर्भवती और प्रसव पीड़ित महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि वैसे तो यहां पर दो महिला डॉक्टर होनी चाहिए। गंगा का कहना है कि सरकार महिला सशक्तीकरण, महिलाओं के स्वास्थ्य रक्षा की बात क्यों करती है, समझ में नहीं आता है। अब डॉक्टरों की तैनाती के लिए आंदोलन किया जाएगा।
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