पिथौरागढ़। फ्रांस के फ्रेंकोइस सुशेल और उनकी पत्नी मारिन सुशेल शुक्रवार को मुनस्यारी पहुंच गए। यह दोनों काठमांडू तक ट्रैकिंग करेंगे। भारत में आने के बाद उन्होंने धर्मशाला हिमाचल प्रदेश से ट्रैकिंग शुरू की। शनिवार को वह मदकोट, बोना, गोल्फा, जिंबा ग्लेशियर होते हुए धारचूला जाएंगे। वहां से नेपाल में प्रवेश करेंगे। इन दोनों का इरादा काठमांडू में ट्रैकिंग पूरा करने का है। वहीं से वह अपने देश को लौट जाएंगे।
फ्रेंकोइस एयर फ्रांस में पायलट हैं, जबकि उनकी पत्नी मारिन दंत रोग विशेषज्ञ हैं। उनको बचपन से ही ट्रैकिंग का शौक रहा है। इस बार उन्होंने हिमालयी क्षेत्र को ट्रैकिंग के लिए चुना। धर्मशाला से करीब 1500 किलोमीटर का सफर तय कर मुनस्यारी पहुंचे इस दंपति ने बताया कि उन्होंने स्पीति घाटी, यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, पिंडर घाटी और सरयू घाटी का सफर पूरा किया। इन घाटियों को उन्होंने ट्रैकिंग की दृष्टि से सबसे बेहतरीन बताते हुए कहा कि इनमें अभी सुविधाओं के विस्तार की सख्त जरूरत है। कई स्थानों पर ट्रैकिंग रूट तक नहीं हैं।
यदि ट्रैकिंग रूट सही ढंग से तैयार किए जाएं तो कुमाऊं और गढ़वाल में पर्यटन का काफी विकास हो जाता। इस दंपति के मुनस्यारी से आगे की ट्रैकिंग की व्यवस्था कॉसमॉस संस्था कर रही है। कॉसमॉस के सुरेंद्र पंवार ने बताया कि यह दंपति किसी भी स्थान पर वाहन का प्रयोग नहीं करता। वह हर सड़क को पैदल ही नापते हैं और कठिन रास्तों को भी आसानी से पार कर लेते हैं।
फ्रेकोइस ने कहा कि कुमाऊं को प्रकृति ने बेहतरीन ढंग से संवार रखा है, सरकार को चाहिए कि वह सुविधाओं का विस्तार करे और पर्यटन व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद करे। उत्साह से लवरेज यह दंपति ट्रैकिंग के दौरान पर्यावरण पर पड़ रहे दुष्प्रभावों, पर्यटन की सुविधाओं, जनजीवन का भी अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में पर्यटन की ढांचागत सुविधाएं ज्यादा बेहतरीन हैं।