धारचूला (पिथौरागढ़)। आखिरकार 16 दिन बाद चीन सीमा के साथ ही आदि कैलाश, मानसरोवर और दारमा, व्यास, चौदास घाटी को जोड़ने वाले टनकपुर-तवाघाट हाईवे पर कुलागाड़ नाले में बेली ब्रिज स्थापित हुआ है।
बीआरओ ने सिर्फ पांच दिन में 170 फीट लंबा बेली ब्रिज तैयार कर इस हाईवे पर सभी वाहनों की आवाजाही शुरू कराई है इससे तीनों घाटियों के लोगों के साथ ही प्रशासन में राहत है। बीते 18 अगस्त को भारी बारिश से चीन सीमा को जोड़ने वाले इस हाईवे पर कुलागाड़ नाले में बना बेली ब्रिज पहाड़ी से बोल्डर गिरने से ध्वस्त हो गया था। ऐसे में दारमा, चौदास और व्यास घाटी का दो दिन तक पूरी तरह संपर्क कटा रहा। बमुश्किल बीआरओ ने नाले में बमुश्किल वैकल्पिक मार्ग तैयार कर छोटे वाहनों की आवाजाही शुरू कराई और नए बेली ब्रिज का निर्माण शुरू किया।
बीते रविवार से नए बेली ब्रिज को तैयार करने का काम शुरू हुआ। पूरी टीम ने सिर्फ पांच दिन में बेली ब्रिज तैयार कर शुक्रवार को इसे नाले में स्थापित करने में सफलता हासिल की। बेली ब्रिज पर सभी वाहनों की आवाजाही शुरू होने से तीनों घाटियों के लोगों के साथ ही सेना को खासी राहत मिली है। हिरक परियोजना के चीफ इंजीनियर एमएल कोम ने नए बेली ब्रिज का उद्घाटन कर पूरी टीम को बधाई देते हुए उनका हौसला बढ़ाया।
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एक एई और छह जेई की टीम ने 35 मजदूरों के साथ मिलकर दिन-रात काम करते हुए बीते बृहस्पतिवार को बेली ब्रिज तैयार किया। शुक्रवार को इस पर आवाजाही शुरू करा दी गई है। -
चंद्र गुप्त, ओसी, 67 आरसीसी, बीआरओ
कुलागाड़ में बेली ब्रिज तैयार कर बीआरओ ने इस पर आवाजाही शुरू करा दी है। बेली ब्रिज का स्थलीय निरीक्षण भी किया गया।
-आशीष जोशी, एसडीएम, धारचूला
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