झूलाघाट (पिथौरागढ़)। नेपाल सीमा पर स्थित जीआईसी झूलाघाट मात्र तीन प्रवक्ताओं के सहारे चल रहा है। विद्यालय में हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, भूगोल, अर्थशास्त्र के पद खाली है। स्टाफ नहीं होने से क्षेत्र की जनता अपने बच्चों को शिक्षा के लिए जिला मुख्यालय भेजने को मजबूर है।
क्षेत्र के एक दर्जन गांवों के साथ ही नेपाल के बच्चों को शिक्षा देने वाले जीआईसी झूलाघाट में प्रवक्ताओं का टोटा हो गया है। इस कारण विद्यालय की छात्रसंख्या दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही है। अभिभावक संघ अध्यक्ष पुष्कर गोबाड़ी ने बताया कि 2013 में विद्यालय की छात्रसंख्या 450 थी। शिक्षकों की कमी के कारण इस वर्ष छात्रसंख्या 205 के करीब रह गई है।
कई बार विभाग को शिक्षकों की नियुक्ति के लिए पत्र भेजने के साथ भी जनता दरबार में भी मामले को उठाया जा चुका है। विद्यालय में प्रधानाचार्य, लिपिक, छह प्रवक्ता और एक एलटी शिक्षक का पद 2015 से रिक्त है। प्रधानाचार्य का पद 2016 से खाली चल रहा है। इससे प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी लड़खड़ा रही हैं।
नेपाल से भी पढ़ने आते हैं छात्र-छात्राएं
झूलाघाट। सीमांत के इस इंटर कॉलेज में भारतीय छात्रों के अलावा नेपाल के बैतड़ी जिले के बाराकोट, सांगड़ी, बुढ्ढा, खड़ेनी, सत्पाली और डुंगरा के 30 से 40 बच्चे भी पढ़ते हैं। विद्यालय में प्रवक्ताओं की कमी के कारण क्षेत्र के लोग अपने बच्चों को पिथौरागढ़ भेजने को मजबूर है। इससे अभिभावकों पर अत्यधिक आर्थिक बोझ पड़ता है। क्षेत्र के लोगों ने शीघ्र शिक्षकों की नियुक्ति नहीं करने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी है।