पिथौरागढ़/मुनस्यारी। धारचूला के उच्च हिमालयी क्षेत्र से वन्य जीवों का शिकार करने वाले चार लोगों को पकड़ने के बाद वन विभाग के हौसले काफी बढ़े हैं। अब वन विभाग सबसे ज्यादा संवेदनशील मल्लाजोहार घाटी में भी शिकारियों के खिलाफ अभियान चलाने की तैयारी में है। इसके लिए रणनीति तैयार की जा रही है और गुप्त तरीके से शिकारियों को पकड़ा जाएगा।
धारचूला के नागलिंग गांव से पकड़े गए चारों शिकारियों को जेल भेजने के बाद वन विभाग की टीम अन्य संवेदनशील इलाकों में छापामारी की रणनीति बनाने लगी है। प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) विनय भार्गव के निर्देश पर अब पंचाचूली, राजरंभा, छिपलाकेदार की तलहटी में सक्रिय शिकारियों को पकड़ा जाएगा। इस बार इन चोटियों के आसपास के बुग्यालों में पिछले साल की तुलना में आग लगने की घटनाएं कम सामने आई हैं। इसकी वजह यह है कि वन विभाग की टीम एक बार इन बुग्यालों का दौरा कर चुकी है।
मुनस्यारी के वन क्षेत्राधिकारी पीएस रौतेला ने कहा कि अब जल्द ही मल्ला जोहार क्षेत्र में सक्रिय शिकारियों को पकड़ा जाएगा। बताया गया कि उच्च हिमालयी क्षेत्र के इन बुग्यालों में अप्रैल के बाद यारसागंबू की खोज करने वाले सक्रिय हो जाते हैं। उसके बाद शीतकाल में शिकारियों की गतिविधियां बढ़ने लगती हैं।
वन विभाग के अधिकारी हालांकि इस काम को चुनौतीपूर्ण मानते हैं, लेकिन एक सटीक रणनीति से शिकारियों को पकड़ने के प्रयास किए जाएंगे। पंचाचूली और राजरंभा के निचले इलाकों में पिछले एक दशक से ठीक शीतकाल में आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं। यह आशंका कई बार उठती रही है कि जनविहीन इन इलाकों में आग लगाने की घटना को सिर्फ शिकारी ही अंजाम दे सकते हैं।
इधर, धारचूला के नागलिंग गांव से पकड़े गए चारों शिकारियों के खिलाफ वन्य जंतु संरक्षण अधिनियम और आर्म्स एक्ट में मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। शिकारियों के कब्जे से मिली तीनों बंदूकें जब्त कर ली गई हैं। वन विभाग और पुलिस के अधिकारी पकड़े गए लोगों को रिमांड पर लेकर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि वन्य जीवों के शिकार में और कितने लोग शामिल हैं, वन विभाग के अधिकारी उन्हें भी पकड़ने का प्रयास करेगी।