मूनाकोट ब्लॉक क्षेत्र में हो रही बारिश से बड़ाबे-धारीऐर और शिलिंगया मार्ग बंद हो गए। भूस्खलन से कई मकानों के आंगन की दीवार गिरने के साथ ही फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। क्वीतड़ के जिल्फोड़ा गांव में भूकटाव से अशोक राम के मकान को खतरा हो गया है। एहतियात के तौर पर घर को खाली कर दिया गया हैं।
रियासी में प्रधान राधिका देवी के मकान की छत पर पेड़ गिर गया। धारीऐर गांव में शकुंतला देवी, शिवराज के घर के पीछे की दीवार गिर गई। भड़कटिया में पीडब्लूडी की नाली बंद होने से पानी दुकानों में जा रहा है। रयूना गांव में मनौली के पास नाले का पानी गांव के घरों मे घुस गया।
बर्तियाकोट में भूस्खलन से जाखपंत को पानी आपूर्ति करने वाली धानापानी, शिलिंग्या पेयजल योजना ध्वस्त हो गई हैं। रिण बिछुल सड़क बहने से सात गाड़ियां फंस गई। गौरीहाट पैदल मार्ग कई जगह टूट गया है। बड़ारी, तोली में भूकटाव से खेतों को नुकसान पहुंचा है। मर्सोली ग्राम सभा में बड़ाबे सड़क टूटी है। पानी के योजना, टैंक को भी क्षति पहुंची है।
सीएम के नहीं आने पर उठाये सवाल
पिथौरागढ़ की तीन तहसीलों में आपदा के बाद भी प्रदेश के मुख्यमंत्री के दौरे पर नहीं आने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। पूर्व प्रवक्ता भुवन पांडेय ने कहा है कि मुनस्यारी, बंगापानी और धारचूला तहसीलों में आपदा में अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। इन तहसीलों के आधा दर्जन से अधिक गांव और तोक अब रहने लायक नहीं हैं। लोग जंगलों में रहने को मजबूर हैं। इसके बावजूद प्रदेश सरकार के मुखिया ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर लोगों का हाल जानने का प्रयास तक नहीं किया।
दस साल पूर्व निर्मित डीडीहाट सिराकोट मार्ग को भूगर्भ विभाग की ओ से अतिसंवेदनशील श्रेणी में रखा गया हैं। इस सड़क पर कभी डामरीकरण नहीं हुआ। इसलिए बरसात में ये सड़क दलदल में बदल जाती है।
डीडीहाट के मुख्य पर्यटन स्थल को मार्ग से जोड़ने के लिए प्रदेश सरकार ने 2008 में इसे साढ़े तीन किमी की मंजूरी दी गई थी। लोनिवि ने 2009 में सड़क काटने का कार्य शुरू किया। बैकुंठ धाम के पास सड़क का कार्य बंद कर दिया गया। उसके बाद से अभी तक डामरीकरण तक नहीं हो पाया है। सिराकोट मंदिर कमेटी के पदाधिकारी प्रकाश बोरा, लवी कफलिया का कहना है कि इस सड़क को बनाने में लाखों रुपये खर्च हो गई और अब विभाग इसे अतिसंवेदनशील की श्रेणी में रख रहा है।
वहीं, क्षेत्रीय विधायक बिशन सिंह चुफाल लोनिवि को सिराकोट सड़क में शीघ्र डामर करने के निर्देश दे चुके हैं। उधर, स्थानीय लोगों ने मार्ग की दशा सही न होने पर अक्तूबर से आंदोलन की चेतावनी दी हैं। लोनिवि के अधिशासी अभियंता जेएस थपलियाल ने बताया कि उक्त सड़क के 200 मीटर भाग को भूगर्भ वैज्ञानिक ने अतिसंवेदनशील बताया हैं, जिस कारण उक्त सड़क पर कोई भी कार्य कराया जाना संभव नही हैं।