पिथौरागढ़। सीमांत जनपद में 108 आपातकालीन सेवा के अधिकांश स्टाफ के छुट्टी पर होने से व्यवस्था लड़खड़ा गई है। हालात यह है कि कर्मचारियों के अवकाश पर होने से कहीं दिन तो कहीं रात में आपातकालीन सेवा संचालित हो रही है।
प्रदेश में आपातकालीन सेवा 108 के लिए नए टेंडर हो गए हैं। अभी तक जीबीकेईएमआरआई सेवा संचालित कर रही थी। अब मध्य प्रदेश की कंपनी केंप (सीएएमपी) के साथ सरकार का अनुबंध हुआ है। पिथौरागढ़ जिले में नौ 108 और इतनी ही खुशियों की सवारी हैं जो अलग-अलग विकास खंडों में सेवा दे रही हैं। यह सेवा दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए वरदान साबित हुई है।
108 सेवा से सबसे अधिक राहत गर्भवती महिलाओं को हुई है। अभी अधिकांश स्टाफ के छुट्टी में होने से सेवा लड़खड़ाई है। ऐसे में कहीं दिन तो कहीं रात में सेवा संचालित हो रही है। इससे मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 108 सेवा के जिला समन्वयक प्रमोद भट्ट ने बताया कि पिथौरागढ़, बेड़ीनाग में दिन-रात दो शिफ्टें चल रही हैं। मूनाकोट, गंगोलीहाट में रात्रि, जबकि धारचूला में दिन में ही सेवा मुहैया कराई जा रही है। थल और डीडीहाट में फार्मासिस्टों के छुट्टी पर होने से सेवा का संचालन नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने बताया कि डीडीहाट में रविवार से सेवा संचालित हो जाएगी। इधर 108 कर्मचारी संगठन के पूर्व अध्यक्ष संजीव बोरा ने बताया कि नई कंपनी कर्मचारियों से पूर्व की अपेक्षा कम मानदेय पर काम लेना चाहती है। उन्होंने कहा कि इससे 108 और खुशियों की सवारी के 60 कर्मचारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।