धारचूला (पिथौरागढ़)। छोटा कैलाश की यात्रा पर गए तीन यात्री नजंग नाले पर फंस गए। बाद में 20 किमी चलकर यात्री बीआरओ के श्रमिकों के कैंप में पहुंचे, जहां उन्हें भोजन उपलब्ध कराया गया।
बंगलूरू के तीन लोग सतीश कुमार, उनकी पत्नी उमा देवी और भाष्करन व्यक्तिगत रूप से छोटा कैलाश की यात्रा पर गए थे। वापसी में यह तीनों दो जुलाई से नजंग नाले, बोलायर, खंडेरा में फंसे रहे। उमा देवी के पिता की मौत की सूचना पर यह लोग जल्द वापसी करना चाहते थे, लेकिन आपदा इनकी राह में रोड़ा बन गई।
इन जगहों पर यात्रियों ने बीआरओ के श्रमिकों के साथ खाना खाया। उमा देवी ने बीआरओ और आईटीबीपी से उन्हें गुंजी से छियालेख तक वाहन से पहुंचाने का अनुरोध किया, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी। बृहस्पतिवार शाम जैसे-तैसे धारचूला पहुंचे तीनों यात्रियों ने अपनी आपबीती पत्रकारों को बताई। उन्होंने खाना खिलाने के लिए बीआरओ श्रमिकों का आभार जताया।
दो यात्रियों को रेस्क्यू कर धारचूला पहुंचाया
धारचूला। छोटा कैलाश की यात्रा पर व्यक्तिगत रूप से गए हरियाणा के सर्जित और तिर्मत को हेलीकाप्टर से रेस्क्यू कर धारचूला लाया गया। दोनों यात्री दो दिन लामारी में रुकने के बाद छह किमी वापस बूंदी पहुंचे। जहां से उन्हें हेलीकाप्टर से धारचूला लाया गया। उन्होंने बताया कि उनके सात साथियों में पांच पुरुष अभी भी वहीं हैं।
पत्रकारों को हैलीपेड जाने से रोका
धारचूला। केंद्रीय भूतल परिवहन राज्यमंत्री मनसुख एल मांडविया और कपड़ा राज्य मंत्री अजय टम्टा शुक्रवार को धारचूला में आपदा पीड़ितों का हाल जानने पहुंचे। इस दौरान सेना के लाइट रेजीमेंट के जवानों से आर्मी हैलीपेड पर पत्रकारों को नहीं घुसने दिया। हैलीपेड में जाने वालों में लोकल नेताओं के नाम तो थे, लेकिन पत्रकारों को इससे दूर रखा गया। कारण जानने पर पत्रकारों से कहा गया कि मीडिया को बाहर करने के निर्देश दिए गए हैं।