पिथौरागढ़। उच्च न्यायालय से अधिसूचना रद्द होते ही नगर पालिका अपने पुराने स्वरूप में लौट आई है। इससे सीमा विस्तार में शामिल छह ग्राम सभाओं का स्वतंत्र अस्तित्व फिर बहाल हो गया है। साथ ही परिसीमन के बाद बढ़े वार्डों की संख्या घटकर फिर 15 हो गई है।
जिले में पिथौरागढ़ नगर निकाय के सीमा विस्तार के बाद छह ग्राम सभाओं को शामिल किया गया था। इनमें दौला, नेड़ा, धनौड़ा, बस्ते, ऐंचोली और सिकराड़ी ग्राम सभा शामिल है। निकाय में इन ग्राम सभाओं को शामिल करने के बाद वार्डों की संख्या पांच बढ़ाकर 20 कर दी गई थी। सरकार ने पांच अप्रैल को अधिसूचना जारी कर सीमा विस्तार पर मुहर लगा दी थी। हालांकि सीमा विस्तार में शामिल गांव शुरू से ही इसका विरोध करते आ रहे थे। इसके बाद विरोध कर रहे ग्राम प्रधानों ने सरकार के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। आखिरकार न्यायालय ने सरकार के फैसले को पलटते हुए सीमा विस्तार के रास्ते बंद कर दिए।
इस तरह उच्च न्यायालय द्वारा अधिसूचना रद्द होते हुए नगर पालिका अपने पुराने स्वरूप में लौट आई है। अधिसूचना रद्द होने के बाद वार्डों की संख्या घटकर फिर 15 हो गई है। इसके साथ ही निकाय में शामिल की गई ग्राम सभाएं भी अपने स्वतंत्र रूप में लौट आई है। सीमा विस्तार को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका करने वाले दौला ग्राम प्रधान भूपेश नगरकोटी ने इसे जनता की भावनाओं की जीत बताया है। इस संबंध में पालिका के ईओ खीमानंद जोशी का कहना है कि न्यायालय के फैसले को देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
सीटों के आरक्षण की तस्वीर भी बदलेगी
सीमा विस्तार की अधिसूचना रद्द होने के बाद चुनावी समीकरणों पर असर पड़ेगा। इससे निकाय की सीटों पर आरक्षण की तस्वीर भी बदल जाएगी। सरकार को अब नए सिरे से निकायों की सीटों में आरक्षण तय करना पड़ेगा। या तो दोबारा परिसीमन करना होगा या फिर पालिका की पुरानी तस्वीर पर ही चुनाव कराए जाएंगे। इससे सीटों के आरक्षण की तस्वीर बदल जाएगी। समीकरण बदलने से संभावित प्रत्याशियों की तैयारी पर भी असर पड़ेगा।