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नगर के 150 व्यापारी समाधान योजना से बाहर

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पिथौरागढ़। जीएसटी लागू होने के बाद समाधान के दायरे में आए नगर के 150 व्यापारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। योजना से बाहर होने के बाद व्यापारी टैक्स जमा नहीं कर पाए। इस कारण अब यह व्यापारी विलंब शुल्क की जद में आ गए हैं। इसे लेकर व्यापारियों में नाराजगी बनी है।
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इस वर्ष पहली जुलाई में जीएसटी लागू होने के बाद पिथौरागढ़ नगर के 150 छोटे व्यापारियों को समाधान योजना में शामिल किया गया था। इन व्यापारियों ने जुलाई, अगस्त, सितंबर में योजना के तहत ही टैक्स जमा किया था, लेकिन जब अक्तूबर, नवंबर, दिसंबर में टैक्स का चालान जमा करने की कोशिश की तो वे समाधान योजना में नहीं मिले। दरअसल सिस्टम ने इन व्यापारियों को समाधान से रेेगुलर योजना में डाल दिया।

समाधान से अचानक हटने के बाद यह व्यापारी टैक्स जमा नहीं कर पाए। अब इन पर टैक्स में देरी से विलंब शुल्क भी लगा दिया गया है। बिना किसी ठोस कारण समाधान योजना के बाहर होने के बाद व्यापारियों में सिस्टम के प्रति नाराजगी है, जबकि इन व्यापारियों की सालाना ब्रिकी 50 लाख रुपये से कम है।
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व्यापारियों ने आयुक्त से लगाई गुहार
समाधान योजना से बाहर होने के बाद व्यापारियों ने जीएसटी आयुक्त को ज्ञापन भेजकर शिकायत दर्ज कराई है। इस संबंध में नगर के उद्योग व्यापार मंडल ने आयुक्त को ज्ञापन भेजा है। कहा है कि पहले योजना में शामिल किए गए छोटे व्यापारियों को अचानक बाहर कर दिया गया। इसके चलते वे मासिक चालान जमा नहीं कर पाए। अब उन पर विलंब शुल्क भी लगा दिया गया है। व्यापारियों ने आयुक्त से पूर्ववत योजना में शामिल करने और विलंब शुल्क से छूट की मांग की है। ज्ञापन में नगर अध्यक्ष शमशेर महर, संयुक्त सचिव दिनेश कापड़ी आदि के हस्ताक्षर हैं।

व्यापारियों की अनभिज्ञता के चलते यह स्थिति पैैैदा हुई है। विभाग व्यापारियों को तकनीकी जानकारी देने के साथ ही समयबद्ध रूप से चालान जमा करने के लिए आगाह करता आ रहा है। विलंब शुल्क में छूट का फैसला सरकार को करना है। -दीपक कुमार, सहायक आयुक्त, वाणिज्य कर, पिथौरागढ़
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