पिथौरागढ़। वित्त मंत्री के जिले को बजट देने में सरकार कंजूसी बरत रही है। इस वित्तीय वर्ष के 11वें माह में जिले को सालाना प्रस्तावित लगभग 8 अरब 75 करोड़ के बजट में 4 अरब 89 करोड़ ही मिल पाया है। इसके चलते विभागों का हाथ तंग है और योजनाओं के समय से पूरा होने पर सवालिया निशान लग गए हैं।
वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए जिले में जिला योजना, राज्य योजना, केंद्र पुरोनिधानित और बाह्य सहायतित योजनाओं में अब तक 3.86 अरब का बजट नहीं मिल सका है। मिलने वाले बजट में बाह्य सहायतित योजनाओं के बजट की हालत सबसे खराब है। इस मद में प्रस्तावित लगभग एक अरब 43 करोड़ में से अब तक 34.95 करोड़ का बजट ही मिल पाया है। इसी तरह राज्य योजना के तीन अरब 30 करोड़ में से दो अरब का बजट ही मिला है।
केंद्र की योजनाओं के तीन अरब 30 करोड़ के बजट में से दो अरब 18 करोड़ का बजट ही मिल पाया है। जिला योजना की हालत भी तंग है। इसमें प्रस्तावित 50 करोड़ 40 लाख के बजट में से 35 करोड़ 89 लाख रुपये ही मिले हैं। कुल मिलाकर देेंखे तो इस वित्तीय वर्ष के 11 माह में 55.90 फीसदी बजट ही मिल पाया है।
पूरा बजट मिलने की नहीं उम्मीद
एक माह में बचा हुआ 3.86 अरब का बजट कैसे मिलेगा। इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। विभागों और कार्यदायी संस्थाओं को भी एक माह के भीतर पूरा बजट मिलने की उम्मीद कम है। इन हालातों में साफ है कि जिले में कई योजनाएं बजट की कमी के चलते इस साल भी पूरी नहीं हो पाएंगी।
योजना प्रस्तावित बजट मिला बजट प्रतिशत
जिला योजना 5040.16 3589 71.21
राज्य योजना 35097.39 20011.15 57.02
केंद्र पुरोनिधानित 33096.71 21848.88 62.02
बाह्य सहायतित 14320.56 3495.13 24.41
इस वित्तीय वर्ष में जिले के सालाना प्रस्तावित बजट का 55.90 फीसदी ही मिल पाया है। बजट का फैसला शासन को करना है। इस संबंध में कुछ नहीं कहा जा सकता। बजट कम मिलने से योजनाओं का काम लंबा खिंच सकता है। -सी रविशंकर, डीएम, पिथौरागढ़
देखा जाएगा कि पूरा बजट मिलने में कहां समस्या आ रही है। इस वित्तीय वर्ष का शेष बजट जल्द जारी करने की कोशिश की जाएगी। आवश्यक योजनाओं को प्राथमिकता से बजट दिया जाएगा। विभागों से प्राथमिकता बताने को कहा है। -प्रकाश पंत, वित्त मंत्री