पिथौरागढ़। बारहमासी सड़क निर्माण का काम अगले महीने से गुरना से आगे शुरू हो जाएगा। गुरना से आगे यह सड़क आबादी के बीच से होकर निकलती है। इग्यारदेवी, धनौड़ा, ऐंचोली के बाद जब सड़क का काम पिथौरागढ़ नगर की सीमा में शुरू होगा तो उससे पैदा होने वाली परेशानी को लेकर लोग अभी से चिंता करने लगे हैं। क्योंकि सड़क निर्माण के समय वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं।
पिछले एक महीने से लोग घाट से गुरना के बीच बन रही सड़क से हो रही परेशानी से जूझ रहे हैं। आबादी वाले इलाकों में सड़क की कटिंग होने पर विवाद की नौबत भी आ सकती है। कुछ लोगों के खेत कटेंगे और किसी के घर में मलबा घुसेगा। लोगों का कहना है कि अब तक हुए सड़क निर्माण के समय किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया है। हर स्थान पर मनमानी की गई है।
दूसरा यह कि यदि आबादी वाले इलाके में सड़क का निर्माण होगा तो प्रशासन ने कोई ऐसा वैकल्पिक प्रबंध नहीं किया है, जिससे यातायात बाधित न हो। सबसे बड़ी समस्या यह है कि पिथौरागढ़ से आगे जाने के लिए कोई अन्य मार्ग नहीं है।
यातायात बाधित न हो इसका ध्यान रखें
ऐंचोली निवासी और जिला अधिवक्ता संस्था के अध्यक्ष मोहन चंद्र भट्ट का कहना है कि बारहमासी सड़क निर्माण का सारा काम नियम के अनुसार नहीं हो रहा है। जब अभी से सड़क निर्माण के समय आफत आने लगी है तो आबादी वाले क्षेत्र में सड़क पहुंचते ही अव्यवस्था हो जाएगी। उनका कहना है कि प्रशासन यह व्यवस्था करे कि सड़क पर यातायात बाधित न हो।
दुर्घटना वाली सड़क न बन जाए
भाकपा माले के जिला सचिव गोविंद कफलिया ने कहा कि टनकपुर-पिथौरागढ़ सड़क पर पिछलेे कई सालों से काम चल रहा है। क्या सड़क की चौड़ाई बढ़ा देने से उसका नाम बारहमासी सड़क हो जाएगा। बारहमासी सड़क निर्माण के दौरान पहाड़ों को जिस बेदर्दी से काटा जा रहा है, उससे तो यही लगता है कि भूकटाव के खतरे ज्यादा बढ़ेंगे। यह सड़क कहीं बारहमासी दुर्घटना वाली सड़क न हो जाए।
गुरना से आगे काम शुरू होने पर गंभीर संकट होगा
उद्योग व्यापार मंडल के महासचिव संतोष बिष्ट का कहना है कि बारहमासी सड़क निर्माण का असर व्यापार पर पड़ रहा है। समय पर सामान नहीं पहुंचने से व्यापारी नुकसान उठा रहे हैं। वह कहते हैं कि गुरना से आगे पिथौरागढ़ की तरफ काम शुरू होने पर समस्या गंभीर हो जाएगी, इसका अंदेशा किसी को नहीं है। वह कहते हैं कि लोग इस समय इस सड़क से यात्रा करने में भी डरने लगे हैं।
मकान और खेत खतरे में आ जाएंगे
घंटाकरण निवासी किशन खड़ायत का कहना है कि सड़क का निर्माण अब तक जिस तरीके से किया गया है, वह गलत है। यदि आबादी वाले इलाके में भी इसी तरह सड़क बनी तो आंदोलन स्वाभाविक हैं। वह कहते हैं कि सड़क को चौड़ा करने के लिए पहाड़ को सीधा काटा जा रहा है। वह भूस्खलन को बढ़ाएगा। आबादी वाले इलाके में तो लोगों के खेत और मकान खतरे में आ जाएंगे।