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खोतिला में भूस्खलन से 150 हरे पेड़ उखड़े

Tue, 18 Oct 2016 10:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला
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खोतिला में भूस्खलन की चपेट में आए हरे पेड़ - फोटो : अमर उजाला
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खोतिला में लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण चीड़ के करीब 150 हरे पेड़ टूटकर गिर गए हैं। कई पेड़ तो महाकाली तक पहुंच गए हैं। पहाड़ दरकने के साथ पत्थर और मलबा गिरने का क्रम जारी है। जल संस्थान ने खोतिला के लिए पेयजल की जिस लाइन की मरम्मत की थी, वह फिर से टूट गई है। खोतिला गांव पूरी तरह अलग-थलग पड़ा हुआ है।
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पिछले दस दिन से जारी भूकटाव से सबसे ज्यादा नुकसान गांव के पंचायती जंगल को हुआ है। गांव के लोगों ने इस जंगल में पेड़ संरक्षित कर रखे थे, लेकिन अब कई पेड़ टूट गए हैं। पेड़ों की जड़ों के अंदर तक भूकटाव हो गया है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता बिलाल यूनुस ने बताया कि खोतिला के लिए बनाई गई पेयजल लाइन फिर से ध्वस्त हो गई है। अब जल संस्थान टैंकर में पानी भरकर पाइप के माध्यम से खोतिला तक पानी पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। दूसरी तरफ घटखोला के पास से नई पाइप लाइन बिछाने का काम शुरू कर दिया गया है। तीन दिन में यह लाइन बनकर तैयार हो जाएगी। इस बार कोशिश की गई है कि नई पेयजल लाइन को भूकटाव का खतरा न हो। इसे सुरक्षित स्थान से बनाया जा रहा है।

जल संस्थान के एई रमेश गर्ब्याल लगातार काम की निगरानी कर रहे हैं। लोनिवि के एई जीएस जनौटी ने बताया कि खोतिला के लिए टीवी टावर के पास से नया रास्ता बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। इस समय खोतिला को जाने वाले दोनों पैदल रास्ते टूटने से लोगों को चार किलोमीटर पैदल चलकर आना पड़ रहा है। खोतिला निवासी हयात सिंह नबियाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य विजय गर्ब्याल, कृष्ण सिंह नपलच्याल, भाजपा नेता महेंद्र बुदियाल ने कहा कि खोतिला के लिए सबसे पहले पैदल रास्ते और पेयजल लाइन का निर्माण किया जाए। उन्होंने कहा कि खोतिला की सुरक्षा के लिए भी ठोस योजना बनाई जाए। 
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घटधार गांव को होने लगा खतरा
खोतिला के भूस्खलन का मलबा महाकाली में पटने से घटधार गांव को खतरा होने लगा है। घटधार में महाकाली के किनारे जितने भी चेकडैम बनाए गए थे, वह मलबे से दब गए हैं। लोगों की मांग है कि तटबंधों की ऊंचाई बढ़ाई जाए, ताकि बारिश के समय नदी का जलस्तर बढ़ने पर नदी से नुकसान की संभावना कम की जा सके। महाकाली में लगातार गिर रहे मलबे और पेड़ों के पट जाने से नदी का प्रवाह किसी भी समय रुक सकता है।
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