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जी भर शोषण कर मानव ने अंत में नाता तोड़ दिया...

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पिथौरागढ़। ज्ञान प्रकाश संस्कृत पुस्तकालय में हुई मासिक काव्य गोष्ठी में शहर में लावारिस छोड़े गए गोवंशीय पशुओं के संरक्षण पर विस्तार से चर्चा हुई। कवियों ने गोवंशीय पशुओं की दुर्दशा पर दर्द बया किया।
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काव्य गोष्ठी की शुरुआत करते हुए डॉ. आनंदी जोशी ने कहा-जी भर शोषण कर मानव ने अंत में नाता तोड़ दिया, कूड़ा खाकर पापी पेट की आग बुझाई हूं, मैं सबकी मां कहलाती हूं। कवियत्री आशा सौन ने कहा- निरीह पशुओं की आंखें, कहो कौन बांचे, प्रति के रिश्ते कहां सांचे, स्वार्थ से मानव हर रिश्ते बांधे, कहते हैं मैं सब धाय हूं, मारी-मारी फिरूं सड़कों पर मां मैं गाय हूं।

कवियत्री लक्ष्मी आर्या ने कहा-धिनुवा थ्यूं खूब खैछ दूध छांछ, बैलो भयूं आब मेरि तरफ को चांछ। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए डॉ. पीतांबर अवस्थी ने कहा कि हिंदू धर्म में गाय को माता कहा जाता है। गाय ने दूध देना बंद किया तो उसे लावारिस छोड़ दिया जा रहा है, इससे शर्मनाक बात और क्या हो सकती है। मनीष जोशी, ललित राठौर, नीरज भट्ट ने भी कविता पाठ किया।
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