गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। वन विभाग के नियमों की खामी ही कही जाएगी कि जीवन के महत्वपूर्ण साल वनों को बचाने में लगाने वाले वन श्रमिकों को सेवा समाप्ति के बाद विभाग एक धेले की भी मदद भी नहीं करता। ऐसे ही एक दैनिक भोगी वन श्रमिक ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को मार्मिक पत्र भेजकर आर्थिक मदद दिलाने की मांग की है।
तहसील के डूनी निवासी मोहन सिंह पुत्र त्रिलोक सिंह ने दैनिक श्रमिक के तौर पर वन विभाग में अल्प वेतन पर 35 वर्षों तक सेवा की। 60 साल की उम्र में 31 दिसंबर 2017 को उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई। जंगलों की सुरक्षा का काम करने वाले मोहन सिंह को सेवा समाप्ति के बाद एक रुपया भी विभाग की ओर से नहीं मिला। इस कारण उन्हें बुढ़ापे में आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है।
मोहन सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि विभाग ने उन्हें बुढ़ापे में लावारिस छोड़ दिया है। कहा कि उनके जैसे कई लोग हैं, जिनके साथ इस तरह का अन्याय हुआ है। उन्होंने मुख्यमंत्री से दैनिक वेतनभोगी सेवानिवृत्त श्रमिकों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए एकमुश्त सहायता अथवा मासिक पेंशन की व्यवस्था करने की मांग की है।