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पति की मौत के बाद मीना ने अपने दम पर की बच्चों की परवरिस

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झूलाघाट (पिथौरागढ़)। पति का साया अचानक सिर से उठ जाए और चार बच्चों के लालन-पालन की जिम्मेदारी आन पड़े तो यह सिर पर पहाड़ गिरने से कम नहीं है। झूलाघाट की मीना पंगरिया के साथ ऐसा ही हुआ, लेकिन मीना ने हौसला नहीं छोड़ा, अपने दम पर चार बच्चों की बेहतर परवरिश कर जीवटता की मिसाल खड़ी की है।
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झूलाघाट कस्बे में परचून की दुकान चलाने वाले मीना के पति प्रयाग दत्त पंगरिया को वर्ष 2008 में फेफड़े के कैंसर से पीड़ित होने का पता चला। कई स्थानों पर प्रयाग दत्त का इलाज कराया, लेकिन उनके स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ। वर्ष 2009 में प्रयाग पंगरिया की मृत्यु हो गई। पति की मृत्यु के बाद यह परिवार दोराहे पर खड़ा हो गया। पत्नी मीना के सिर पर 3 लड़कियों और 1 लड़के के लालन-पालन की जिम्मेदारी आ गई। उस समय सभी बच्चे 16 साल से कम उम्र के थे। पति को खोने के बाद मीना ने बच्चों के भविष्य के लिए अपना हौसला बनाए रखा। पति की मौत के बाद सगे संबंधियों ने भी कोई मदद नहीं की। ना ही सरकार से परिवार के मुखिया की मृत्यु पर ही कुछ मिल पाया।

मीना परचून की दुकान तो आगे नहीं चला पाई, उन्होंने झूलाघाट के आसपास मिलने वाले स्थानीय उत्पादों को रोज पिथौरागढ़ लाकर बेचना शुरू किया। इससे परिवार की गाड़ी आगे खिंचने लगीं। बड़ी लड़की को मामा के घर रखकर शिक्षा दिलाई और एमए करने के बाद वह प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने लगी। उससे छोटी लड़की ने भी एमए करने के बाद झूलाघाट में सौंदर्य प्रसाधन की दुकान खोल दी।
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सौंदर्य प्रसाधन की दुकान में मीना भी बेटी का हाथ बंटाने लगीं। मीना ने अपनी तीसरी बेटी को पॉलीटेक्निक की शिक्षा दिलाई। बेटा कक्षा 9 में पढ़ता है। पिछले साल मीना ने सबसे बड़ी बेटी का विवाह कर दिया है। मीना परिवार की गाड़ी को बेहतर ढंग से खींच रही हैं। जिस तरह से मीना ने पति की मौत के बाद हौसला दिखाया, उससे और लोगों को भी प्रेरणा मिली है कि जिंदगी में किसी भी दुख का सामना मजबूती से करना चाहिए, उससे घबराना नहीं चाहिए।
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