पिथौरागढ़। ज्ञान प्रकाश संस्कृत पुस्तकालय की मासिक काव्य गोष्ठी में कवियों ने होली की रंगत बिखेरी। गोष्ठी में होली पर नशापान न करने का आह्वान किया गया।
गोष्ठी का संचालन करते हुए कवियत्री आशा सौन ने कहा-फिर महकने लगे चौबारे, फिर गांव की गलियों में बढ़ी खरगोशियां, फिर चटकने लगे टेसू-गुलाल, फिर फागुन की मदमाती रंगीनियां हैं। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे डॉ. प्रमोद कुमार क्षेत्रीय ने होली पर कुछ यूं कहा-मदभरी हवाओं में फागुन की मस्ती है, होली की रंगत है, खुशियों की बस्ती है।
बाल कवि मनीष ने-कैसे गाथा गाऊं, हिंदी जैसी भाषा की, कैसे करूं बखान हिंदी की परिभाषा की, वरिष्ठ कवियत्री डॉ. आनंदी जोशी ने-दिन दोफरि निगाड़ तू नीन, कर्म करि कटाल अदीन, कस कमर तू उठ मनखी, खुट पसारि नि बजौ बीन, हेमा थलाल ने -नशा नाश का गान है, जीवन मानव को वरदान है, होली रंगों का त्योहार है, होली अपने परायों का प्यार है, डॉ. पीतांबर अवस्थी ने-शराब का अत्यधिक सेवन, पहाड़ की जवानी को खोखला कर रहा, आने वाली पीढ़ी की फिजां बिगाड़ रहा, सुनाया। नवांकुर अनीता जोशी मंजुला अवस्थी, जयंश्री लोहनी, हेमा आर्या, अनिल जोशी, तनुजा आदि ने कविता पाठ किया।