पिथौरागढ़। कुमाऊंनियों की सबसे पहली सैन्य बटालियन 3 कुमाऊं राइफल्स के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य पर वेबसाइट तैयार की जा रही है। इस वेबसाइट को तैयार करने का सारा काम सेना के रिटायर्ड मेजर जनरल आरके कौशल कर रहे हैं। वेबसाइट में 3 कुमाऊं राइफल्स का इतिहास, विभिन्न युद्धों में इस बटालियन की ओर से दिखाए गए शौर्य का विवरण शामिल रहेगा। सेना की इस खास बटालियन के बारे में कोई भी व्यक्ति वेबसाइट से जानकारी हासिल कर सकेगा। वेबसाइट अगले महीने तक लांच हो जाएगी। वेबसाइट का पता कुछ दिन में सार्वजनिक कर दिया जाएगा।
मेजर जनरल (रि) कौशल ने कहा कि 3 कुमाऊं राइफल्स के इतिहास और वीर शहीदों पर एक पुस्तक भी प्रकाशित की जाएगी। पुस्तक के प्रकाशन का दायित्व राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता शिक्षक राजेश मोहन उप्रेती को सौंपा गया है। मेजर जनरल ने बताया कि 3 कुमाऊं राइफल्स का शताब्दी समारोह 23 अक्तूबर को मनाया जाएगा। इसी दिन इस बटालियन को 100 वर्ष पूरे हो जाएंगे।
उन्होंने बताया कि 3 कुमाऊं राइफल्स के वीर सैनिक सूबेदार मेजर चंद्री चंद, होशियार सिंह महर, कैप्टन त्रिलोक सिंह रौतेला, सूबेदार भवान सिंह, कैप्टन राम सिंह थापा, कीर्ति चक्र विजेता नायक गोपाल सिंह, सूबेदार प्रताप सिंह, मथुरादत्त पुनेड़ा, सूबेदार दलीप चंद, केदार सिंह महर, उर्वादत्त भट्ट, लछिमन चंद, हरीश चंद्र कापड़ी, केदार सिंह महरा, कैप्टन उमेद सिंह लुंठी और देवी दत्त पुनेड़ा के बारे में जानकारी पुस्तक के लिए तैयार हो चुकी है। पुस्तक का 65 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है।
उन्होंने कहा कि 3 कुमाऊं राइफल्स के ऐसे सैनिक और अधिकारी जिनको वीरता पुरस्कार, पदक या सेना में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया हो वह उनका जीवन परिचय, फोटो एवं अन्य दस्तावेज पुस्तक लेखक राजेश मोहन उप्रेती को 15 अगस्त से पहले उपलब्ध करा दें। उसके बाद ऐसे वीरों का नाम पुस्तक में शामिल कर पाना संभव नहीं होगा। सेना की 3 कुमाऊं राइफल्स में सभी सैनिक कुमाऊंनी होते हैं। 23 अक्तूबर 1917 को इस सेना को खड़ा किया गया था।