मदकोट में इसी स्थान से गिरी थीं भेड़ें
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वर्ष 2013 की आपदा में क्षतिग्रस्त मदकोट बाजार से गुजरते समय मूल प्रवास जोहार जा रहे भेड़ पालकों की 12 भेड़ नदी तट में गिरकर मर गईं। आपदा के चार साल बीतने के बाद भी क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत नहीं हो पाई है। बाजार का ये हिस्सा करीब 60 मीटर की गहराई में नदी तट तक कट चुका है। 2013 की आपदा में मदकोट बाजार में 12 मकान नदी में समा गए थे। बाजार में खाई बन गई थी।
बुधवार सुबह करीब 5 बजे बोना गांव के भेड़पालक नवीन सिंह और कुंदन सिंह 300 भेड़ों के साथ आपदा से क्षतिग्रस्त हिस्से के पगडंडीनुमा रास्ते से गुजर रहे थे। अचानक एक के बाद एक 12 भेड़ गोरी नदी के तट पर जा गिरीं और दम तोड़ दिया। भेड़पालकों ने किसी तरह अन्य भेड़ों को नदी में गिरने से बचाया। जिस स्थान से भेड़ नदी तट में गिरी हैं, उस स्थान पर पहले मोटर सड़क हुआ करती थी।
भेड़पालकों ने घटना की सूचना राजस्व उप निरीक्षक गणेश सिंह टोलिया को दी है। बताया है कि एक भेड़ 4500 रुपये कीमत का था। इस हिसाब से उन्हें 54000 रुपये का नुकसान हुआ है। भेड़पालकों ने आपदा मद से क्षति का मुआवजा देने की मांग की है। इस स्थान पर पहले भी हादसे हो चुके हैं। क्षेत्र के लोगों ने दुर्घटनास्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के साथ ही वैकल्पिक रास्ता तैयार करने की मांग की है।