अस्कोट (पिथौरागढ़)। सीमांत जिले में आज भी स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। कई जगहों पर विकास की किरण नहीं पहुंचने से ग्रामीणों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सीमांत क्षेत्र में आज भी कई गांव ऐसे हैं, जहां मरीजों को डोली से लाया जा रहा है। राज्य बनने के 18 वर्ष बाद भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों में व्यवस्था के प्रति आक्रोश पनप रहा है।
अस्कोट की ग्राम पंचायत देवल के जाकोट तोक के ग्रामीण आज भी सड़क से वंचित हैं। करीब 350 की आबादी वाले तोक में किसी वृद्ध, बच्चे, महिला के बीमार होने पर उसे डोली में बैठाकर चार किमी की खड़ी चढ़ाई पार कर अस्कोट लाना पड़ता है। बीते दिन गांव की राधिका देवी (60) बीमार हो गई थी।
ग्रामीणों ने बीमार महिला को डोली पर बैठाकर चार किमी की खड़ी चढ़ाई पार कर अस्कोट पहुंचाया। यहां निजी क्लीनिक से महिला को दिखाकर दवाइयां दी गईं। अब परिजन उन्हें हल्द्वानी ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। महिला को डोली में लेकर आए गांव के पूर्व सूबेदार आनंद सिंह खत्री, विनोद खत्री, जगदीश सिंह, नारायण सिंह, प्रेम सिंह, भूपेंद्र सिंह, फकीर सिंह, दीपांकर आदि ने बताया कि लंबे समय से सड़क की मांग की जा रही है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। खुद की उपेक्षा पर ग्रामीणों में विधायक और शासन, प्रशासन के खिलाफ भी आक्रोश पनप रहा है।