नाचनी (पिथौरागढ़)। ग्राम पंचायत क्वीटी के मोडम ग्राम की तीन हजार नाली जमीन को सिंचित करने वाली नहर वर्ष 2014 की आपदा के बाद से बंद पड़ी है। खेतों की सिंचाई के लिए बनी ढाई किलोमीटर लंबी नहर के बंद होने से सूखे के हालात पैदा हो गए हैं। सिंचाई विभाग से शिकायत करने पर भी समस्या का समाधान न होने से किसानों में रोष है।
ग्रामीणों ने धान की बुआई के समय भी अपने प्रयासों से स्थानीय स्रोतों और वर्षा जल का संग्रहण कर धान की रोपाई की थी, लेकिन अब ऐसे हालात हो गए हैं कि ग्रामीणों को गेहूं की बुआई के लिए खेतों को पानी मिल पाना संभव नहीं है। किसानों का कहना है कि सूखे पड़े खेतों में बिना सिंचाई के गेहूं की बुआई करना संभव नहीं है। मोडम ग्राम में लीची की फसल भी किसानों की आमदनी का अच्छा स्रोत है। यहां लीची की अच्छी पैदावार होती है। गांव के हर परिवार के लगभग सौ पेड़ लीची के हैं, लेकिन सिंचाई के अभाव में लीची के पेड़ भी सूखने लगे हैं।
स्थानीय निवासी जयसिंह मेहता का कहना है कि सिंचाई की व्यवस्था न होने से हर किसान परेशान है। कई बार विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से सिंचाई नहर को ठीक करने की गुहार लगाई गई, लेकिन नहर की मरम्मत नहीं की गई। उन्होंने विभाग को चेतावनी दी है कि गेहूं की बुआई तक अगर सिंचाई नहर को ठीक नहीं किया गया तो वह क्षेत्र के लोगों के साथ विभाग के खिलाफ आंदोलन करेंगे।
वहीं, सिंचाई विभाग सहायक अभियंता हेम उपाध्याय ने कहा कि आपदा के दौरान जिले में कई सिंचाई नहरें ध्वस्त हो गई थी। आपदा से प्रभावित हुई सिंचाई नहर को आपदा मद से ही बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विभाग के पास अन्य कोई भी मद नहीं है, जिससे सिंचाई नहर को ठीक किया जा सके। उन्होंने कहा कि आपदा मद में बजट आते ही सिंचाई नहर को ठीक कर दिया जाएगा।