फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीमांत के युवाओं ने पर्वतारोहण में फहराए झंडे

विज्ञापन
विज्ञापन
दिनेश अवस्थी
विज्ञापन

पिथौरागढ़। सीमांत जिले की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और संसाधनों के अभाव में यहां के युवाओं ने पर्वतारोहण में बुलंदी के झंडे फहराए हैं। आज भी यहां के युवा अपनी जीवटता और कड़े संघर्ष से एवरेस्ट फतह का सपना संजोए हैं। यदि इन युवाओं को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता मुहैया कराई जाए तो निसंदेह वे एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने में कामयाब रहेंगे।

बीएसएनएल से सेवानिवृत्त पर्वतारोही पुरमल सिंह धर्मशक्तू ने युवावस्था में गढ़वाल की स्वर्गरोहिणी को पहली बार फतह किया। उन्होंने दुर्गम माने जाने वाली पंचाचूली-तीन चोटी को भी आसानी से पार किया था। मुनस्यारी के ही लवराज धर्मशक्तूूूू सात बार एवरेस्ट फतह कर चुके हैं। मोहन सिंह गुंज्याल, चंद्रप्रभा एतवाल, सुमन कुटियाल, बासू पांडेय, शीतल राज, मनीष कसनियाल, काशी खत्री, तारा खत्री समेत सौ से अधिक लोग ऐसे हैं, जिन्होंने कोई न कोई चोटी फतह की है। वर्तमान में आइस संस्था के बासु पांडेय अपने प्रशिक्षकों शीतल राज, नंदा, ज्योति के निर्देशन में 35 युवाओं को पर्वतारोहण के लिए तैयार कर रहे हैं। नए युवाओं के लिए पर्वतारोहण आसान भी नहीं हैं।
विज्ञापन


हाल ही में पश्चिमी छोर से नंदा लपाक (5783 मीटर) को फतह करने वाले 23 वर्षीय मनीष 17 वर्ष की उम्र से पर्वतारोहण से जुड़ गए। मनीष विश्व के सात महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटी को फतह करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि एवरेस्ट फतह करने के लिए कम से कम 25 लाख रुपये चाहिए। इसके लिए वो प्रायोजक ढूंढ रहे हैं। उन्होंने जन प्रतिनिधियों से भी गुहार लगाई लेकिन सकारात्मक प्रतिक्रिया उन्हें अब तक नहीं मिली है।
विज्ञापन



नैन सिंह सर्वेयर माउंटेनयरिंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट देता है प्रशिक्षण
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में साहसिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए 2015 में मुनस्यारी में पं. नैन सिंह सर्वेयर माउंटेनयरिंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट स्थापित किया गया। पर्वतारोही रीना कौशल धर्मशक्तू को इसका ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) बनाया गया। उन्होंने बताया कि अब तक 500 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है। अभी संस्थान का भवन निर्माणाधीन है। इसके बनने और स्टॉफ की तैनाती हो जाने के बाद प्रशिक्षण में भी तेजी आएगी। वर्तमान में युवाओं को खलिया, बलांती और पातलथौड़ में प्रशिक्षण दिया जा रहा ह्रै।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें