पिथौरागढ़। आपदा ने सीमांत धारचूला तहसील के दारमा क्षेत्र के गांवों को अलग-थलग कर दिया है। फिलम से दुग्तू राजमार्ग तक पहुंचने के लिए एक पुल तक नहीं है। झूला पुल का निर्माण करने की मांग को लेकर जिला मुख्यालय पहुंचे क्षेत्रवासियों ने प्रदर्शन किया।
रविवार को जिला मुख्यालय पहुंचे धारचूला क्षेत्रवासियों ने जिलाधिकारी को सौंपे ज्ञापन में कहा कि फिलम ग्राम सभा से दुग्तू राजमार्ग के बीच एक कच्चे पुल का निर्माण किया गया था। यह पुल इन दोनों गांवों के साथ ही अन्य क्षेत्रों को भी जोड़ता था। एक वर्ष पूर्व पुल बहने के बाद सभी गांव अलग-थलग पड़े हैं। फिलम और दिलिन दारमा सेवा समिति ने सरकार से पुल निर्माण की मांग की थी, लेकिन आज तक इस मामले में कोई पहल नहीं की गई। इससे ग्रामीणों को राजमार्ग तक पहुंचने के लिए दस किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ रही है।
चट्टानी रास्ता होने से भूस्खलन और पहाड़ी से पत्थर गिरने का खतरा बना रहता है। कहा कि असुविधा के कारण अधिकांश ग्रामीण तराई की ओर पलायन कर चुके हैं। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से दोनों गांवों के बीच एक झूलापुल बनाने की मांग की। जिलाधिकारी सी रविशंकर ने वर्ल्ड बैंक के माध्यम से झूला पुल का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
ज्ञापन सौंपने वालों में जितेंद्र फिरमाल, विंद्रा देवी, मानकी फिरमाल, सीता, गंगोत्री, सरस्वती, कमला, विखुमा, जशोदा, देवकी, कृष्ण फिरमाल, खीम सिंह, गगन सिंह, पूरन ग्वाल, प्रकाश, नेत्र, गजेंद्र आदि शामिल थे।