इस बार जाड़े के मौसम में कम बर्फबारी से पिथौरागढ़ की हिम चोटियां काले पड़ने लगी हैं। कम बारिश एवं बर्फबारी से हिमालयी क्षेत्र में पानी की कमी होने लगी है और तापमान में बढ़ोतरी होने लगी है। कम बारिश, बर्फबारी को खेती के लिए भी नुकसानदायक माना जा रहा है। कम बर्फबारी के साथ ही बारिश न होने से लोगों की चिंता बढ़ गई है।
अमूमन दिसंबर, जनवरी में बारिश, बर्फबारी होती है, लेकिन इस बार निचले क्षेत्र तो छोड़िए, हिमालयी क्षेत्र में भी कम बर्फबारी हुई है। इस बार के जाड़ों में निचले क्षेत्रों में बर्फबारी तो दूर बारिश तक नहीं हुई है। समुद्र तल से 2700 मीटर की ऊंचाई पर नामिक, हीरामणि ग्लेशियर की तलहटी पर बसे नामिक क्षेत्र में 12 दिसंबर 2017 के बाद बारिश, बर्फबारी नहीं हुई है, जबकि अन्य वर्षों में नवंबर से ही बारिश, बर्फबारी होने लगती थी। 12 दिसंबर को जब बर्फबारी हुई थी तो नामिक, हीरामणि ग्लेशियर बर्फ से लकदक हो गए थे। नामिक गांव बर्फ से ढक गया था। एक महीना दस दिन के अंतराल में बारिश, बर्फबारी न होने से हिमालय की चोटियां काली पड़ने लगी हैं। नामिक की प्रधान तुलसी जेम्याल, ग्रामीण बहादुर सिंह ने बताया कि बारिश, बर्फबारी न होने से पानी के स्रोतों में पानी कम होने लगा है। अन्य सालों की अपेक्षा गर्मी बढ़ने लगी है। उनका कहना है कि कम बर्फबारी, बारिश का असर खेती पर भी पड़ेगा। गर्मियों में पानी का संकट पैदा होगा।
12 दिसंबर 17 के बाद क्षेत्र में नहीं हुई है बारिश, बर्फबारी
हिमालयी क्षेत्र में कम होने लगा पानी, बढ़ने लगी गर्मी
खेती पर असर पड़ने के साथ ही गर्मी में होगा पानी का संकट
बारिश, बर्फबारी से लिहाज से इस समय मौसम प्रतिकूल है। पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय नहीं हुआ है, इस वजह से बारिश, बर्फबारी कम हुई है। आने वाले समय में बर्फबारी की संभावना है। बारिश, बर्फबारी के बाद स्थिति में सुधार आएगा।
- डॉ. आनंद शर्मा, उप महानिदेशक, मौसम विज्ञान विभाग, भारत सरकार नई दिल्ली।