पिथौरागढ़। करीब डेढ़ सौ वर्ष से घर पर रखी तिजोरी अब राजकीय संग्रहालय की शोभा बढ़ाएगी। करीब 150 किलोग्राम वजन वाली इस तिजोरी को 1860 में सुभाष चौक निवासी प्रेम बल्लभ खर्कवाल ने तैयार करवाई थी। तब खर्कवाल परिवार नेपाल के जिलों में व्यापार के लिए जाया करता था। बाद में उनके बेटे गौरीदत्त खर्कवाल ने कुछ वर्षों तक इसका उपयोग किया। तीसरी पीढ़ी में विद्या खर्कवाल ने इस तिजोरी को राजकीय संग्रहालय को सौंप दिया है।
विद्या खर्कवाल ने बताया कि पुराने जमाने में इस तिजोरी का महत्व रहा होगा। उस समय चांदी और सोने के सिक्कों का प्रचलन अधिक था। आज की तरह बैंक नहीं थे। लोग व्यापार से होने वाली आय को तिजोरी में सुरक्षित रखते थे। लंबे समय तक तिजोरी में सिक्के रह भी जाएं तो उनमें कोई खराबी नहीं आती थी। आज के समय में लोग ज्यादा नकदी अपने पास नहीं रखते।
उन्होंने बताया कि समय के साथ कुछ वस्तुओं की आवश्यकता कम हो जाती है, लेकिन इन वस्तुओं का ऐतिहासिक महत्व समाप्त नहीं होता। संग्रहालय को सौंपने के पीछे यही मकसद है कि लोग इन प्राचीन वस्तुओं के बारे में अध्ययन कर सकें। यह तिजोरी जंक प्रूफ लोहे से बनी है। 1860 में यह जितनी चमक देती थी उतनी ही चमक इसमें आज भी है।
पुरातत्व इकाई अल्मोड़ा के प्रभारी डॉ. सीएस चौहान ने भी इस तिजोरी को देखा और संग्रहालय को सौंपने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि उनके पास कोई पुरानी वस्तु है तो उसे संग्रहालय को सौंप दें।