पिथौरागढ़। स्वच्छता अभियान के तहत इन दिनों हाथ में झाड़ू एवं सफाई के अन्य उपकरणों को पकड़कर हर विभाग, संस्था, विद्यालय के लोग सड़कों पर जरूर नजर आ रहे हैं, लेकिन सफाई अभियान की सच्चाई कई दफ्तरों में आसानी से नजर आ रही है। यहां कई दफ्तरों के शौचालयों की गंदगी को कभी साफ नहीं किया जाता। कलक्ट्रेट परिसर में बने शौचालयों की हालत को देखकर तो ऐसा लगता है कि जैसे इनमें कभी सफाई नहीं होती।
कलक्ट्रेट में कई कर्मचारी काम करते हैं, इसके अलावा जिले के विभिन्न हिस्सों से रोज कई लोग काम के लिए आते रहते हैं। उनकी सुविधा के लिए बनाए गए शौचालयों की हालत बेहद खराब है। सड़कों पर कूड़ा, कचरा साफ करने के अभियान तो लगभग रोज हो रहे हैं, लेकिन वास्तव में जहां पर सफाई होनी चाहिए, वहां पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी स्वच्छता अभियान का आह्वान होते ही सड़कों पर जरूर निकल जाते हैं। आसपास के इलाकों से कूड़ा-कचरा हटाकर सफाई अभियान की इतिश्री कर ली जाती है। कलक्ट्रेट में काम करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि शौचालयों की गंदगी से काफी परेशानी होती है। सफाई क्यों नहीं होती, इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है।
पूछने पर साहब बोले, सफाई पर खास ध्यान देंगे
पिथौरागढ़। कलक्ट्रेट परिसर के शौचालयों की गंदगी को देखकर तो लगता है कि इनकी अब तक किसी ने सफाई नहीं की है, लेकिन जब अपर जिलाधिकारी मोहम्मद नासिर से इस बाबत पूछा गया तो वह बोले कलक्ट्रेट परिसर में स्थित सभी शौचालयों की सफाई पर खास ध्यान दिया जाता है। यदि किसी कारणवश इनमें सफाई नहीं हो पाई है तो शीघ्र सफाई के निर्देश दिए जा रहे हैं। भविष्य में इस तरह की शिकायत सामने आने पर संबंधित जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सफाई के नाम पर दिखावा न हो
पिथौरागढ़। एडवोकेट खीमराज जोशी का कहना है कि सफाई अभियान के नाम पर दिखावा नहीं होना चाहिए। सफाई के विचार को लोग अंदर से महसूस करें और प्रचार का साधन न मानें। वह कहते हैं कि स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर यह धारणा ठीक नहीं है कि हाथ में झाड़ू पकड़कर फोटो खींच लिया जाए और बाद में सफाई की चिंता और चर्चा ही न की जाए।