नाचनी (पिथौरागढ़)। रातीगाड़ में जमीन दरकने का सिलसिला कई सालों से चल रहा है। जमीन दरकने से रसियाबगड़ वन पंचायत की एक हेक्टेयर जमीन पर दरार आ गई है। पहाड़ी दरकने से बोरागांव के 15 परिवारों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। रामगंगा नदी का रुख पलटने से यह परेशानी खड़ी हुई है। रातीगाड़ के साथ ही हरड़िया के हालात भी खतरनाक हो गए हैं।
रातीगाड़ के पास वर्ष 2000 में रामगंगा में मलबा जमा हो गया था। इससे बीच में बहने वाली नदी का रुख किनारे की ओर हो गया। रातीगाड़ से लगी पहाड़ी से कटान होने लगा। तब से अब तक वन पंचायत की 5 हेक्टेयर जमीन रामगंगा में समा चुकी है। पांच परिवारों की एक हेक्टेयर नाप भूमि भी बह गई है। गांव के लोगों का मंदिर समूह बह गया है। हर साल बरसात में जमीन दरकती है। नदी का रुख मोड़ने से ही इस समस्या का समाधान हो सकता है। रातीगाड़ के साथ ही हरड़िया में सड़क को नुकसान पहुंचता है। लोनिवि और प्रशासन नदी का रुख मोड़ने की बात वर्ष 2013 से कर रहा है, लेकिन धरातल पर कुछ हो नहीं रहा है।
एक प्रकार से रातीगाड़ और हरड़िया का भूस्खलन एक विकट समस्या बन गया है। तीन महीने पहले विश्व बैंक की टीम ने रातीगाड़ और हरड़िया का सर्वे किया था। टिहरी हाइड्रोपावर डेवलपमेंट कांपलेक्स ने पिछले साल पहाड़ी की जांच की थी। हरड़िया के लिए 10 करोड़, रातीगाड़ के लिए 6.5 करोड़ रुपये का प्रस्ताव विश्व बैंक को सौंपा था। अब तक ट्रीटमेंट का काम शुरू नहीं हुआ। पहाड़ी का ट्रीटमेंट नहीं हुआ तो रातीगाड़ और हरड़िया में कभी भी तबाही मचने की आशंका है।
नारायण राम, हरक राम, गणेश राम, कालू राम, कालू राम द्वितीय, शेर राम, शेर राम द्वितीय, नैन राम, मोहन राम, लक्ष्मण राम, पुष्कर राम, धरम राम, नाथू राम, राजेंद्र राम, माधो राम के परिवारों पर हर समय खतरा मंडराता रहता है।
गढ़वाल के वरुणावत पर्वत की तर्ज पर रातीगाड़ और हरड़िया में पहाड़ी का ट्रीटमेंट होना है। धन स्वीकृत हो गया है। भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई चल रही है। दिसंबर तक काम शुरू होने की संभावना है। -एनके तिवारी, सहायक अभियंता विश्व बैंक डिवीजन।