पिथौरागढ़। भारत-नेपाल सीमा पर काली नदी के किनारे बसे मूनाकोट विकास खंड के क्वारबन गांव के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। गांव तक सड़क नहीं होने से ग्रामीण आज भी मरीजों को डोली पर ढोने को विवश हैं। सुविधाओं से वंचित गांव में अब केवल 319 लोग बचे हैं। ग्रामीणों में खुद की उपेक्षा पर आक्रोश पनप रहा है।
क्वारवन गांव में हालात इस कदर बदतर हैं कि गांव से बकरी चराने गए किसान कल्याण सिंह जब चोटिल हुए तो खराब मौसम के चलते वह 24 घंटे तक पर घर ही रहे। बाद में बड़ी मुश्किल से उन्हें अस्पताल त पहुंचाया गया। इस गांव के कई लोग देश की रक्षा में शहीद हुए हैं। वर्तमान में गांव के कई लोगों ने संसाधनों के अभाव में गांव छोड़ दिया है।
वर्तमान में गांव से चार किमी दूर धारी ऐर में लोनिवि द्वारा सड़क निर्माण का कार्य चल रहा है। दो जॉब पर कार्य चल रहा है लेकिन अन्य दो जॉब में निर्माण न होने से ग्रामीण सड़क से वंचित हैं। पीएमजीएसवाई द्वारा भी 2018 में ग्राम क्वारबन के लिए सड़क स्वीकृत की गई लेकिन लेकिन वन भूमि आपत्ति के कारण मामला लटका हुआ है। ग्रामीण देवेंद्र मेहता का कहना है कि जन प्रतिनिधि हर बार विकास के दावे ग्रामीणों को दिखाते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई दिखाई नहीं देता है।