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नुकसान डेढ़ लाख का मुआवजा मिल रहा 340 रुपये

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मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। एक और दो जुलाई को आई आपदा में मुनस्यारी के दर्जनों गांवों में मत्स्य पालन का कारोबार कर रहे ज्यादातर किसानों के मत्स्य तालाब और कई लोगों की गोशाला ध्वस्त हो चुकी है, लेकिन लोगों को मुआवजा मिलने में दिक्कतें आ रही हैं।
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यदि किसी का मत्स्य तालाब क्षतिग्रस्त है, तो उसका मुआवजा 136 रुपये प्रति नाली है। पैंकुति के बहादुर सिंह, मंगल सिंह का मत्स्य तालाब लगभग दो से ढाई नाली में था, अब यदि 136 रुपये प्रति नाली के हिसाब से मुआवजा मिलता है तो ढाई नाली का मात्र 340 रुपये ही मुआवजा मिलेगा, जबकि एक मत्स्य तालाब बनाने में लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये का खर्च आता है। इसी प्रकार किसी की गोशाला आवास से हटकर है, तो उसे कोई मुआवजा नहीं मिल रहा है। यदि आवास से सटी है तो उसे 2100 रुपये का मुआवजा दिया जा रहा है।

रांथी गांव के महेंद्र राम की गोशाला आवास से हटकर है और ध्वस्त है, लेकिन उसे मुआवजा नहीं मिल पा रहा है। आवास के मामले में भी कमोबेश स्थिति कुछ ऐसी ही है। अब तक उत्तराखंड में जो भी सरकार रहीं, सभी केंद्र सरकार के आपदा एक्ट के ही मुताबिक चलती रही हैं। उत्तराखंड का अपना कोई आपदा प्रबंधन अधिनियम अब तक नहीं बना है जो उत्तराखंड की भौगोलिक स्थितियों के मुताबिक हो। उधर, एसडीएम कृष्ण नाथ गोस्वामी का कहना है कि भारत सरकार के एक्ट के मुताबिक ही मुआवजा बांटा जा रहा है।
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