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फार्मेसिस्ट के भरोसे चले रहे 40 स्वास्थ्य केंद्र

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पिथौरागढ़। सीमांत जिले की लाखों की आबादी को चिकित्सा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिले के 40 स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सक विहीन हैं। ये केंद्र फार्मेसिस्टों के भरोसे चल रहे हैं। अस्पतालों में सिर्फ मामूली रोग का ही इलाज हो पा रहा है। ये अस्पताल बस दवा वितरण केंद्र बनकर रह गए हैं।
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जिले में चिकित्सकों के 186 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 120 पद खाली चल रहे हैं। इन हालातों के बीच जिले के 40 स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सक ही नहीं हैं। ये केंद्र फार्मेसिस्ट के भरोसे चल रहे हैं। इनमें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गणाई गंगोली, तेजम, मदकोट के अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मूनाकोट और सोसा, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मुवानी, भागीचौरा, थल, चौडमन्या, महिला अस्पताल थल और बेड़ीनाग, राजकीय अस्पताल रामेश्वर, पोखरी, कंडारीछीना, बनकोट, बिनकोट, पांगू, खेला, खेत, जुम्मा, दुग्तू, गुंजी, आणागांव, ख्वाकोट, सिंधाली, तीतरी, देवलथल, छड़नदेव, क्वीटी, उच्छैती, बोना, दुम्मर, चमाली, हरड़कटिया, हचीला, पंथाली, भुवनेश्वर, धरमघर, जाबुकाथल, पांखू स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं।

इन केंद्रों पर सर्दी, बुखार जैसे मामूली रोगों की दवा और मरहम पट्टी के अलावा कोई इलाज नहीं हो रहा है। इन क्षेत्रों के रोगियों को इलाज के लिए कई किमी दूर स्थित चिकित्सकों की तैनाती वाले स्वास्थ्य केंद्रों या फिर मुख्यालय आना पड़ रहा है।
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स्वास्थ्य केंद्र स्वीकृत पद रिक्त
गंगोलीहाट 9 6
गणाईगंगोली 19 16
बड़ालू 12 6
कनालीछीना 15 12
धारचूला 22 15
मुनस्यारी 19 18
डीडीहाट 17 13
बेड़ीनाग 14 13
पिथौरागढ़ 50 19
इग्यारदेवी 9 2

नौ हजार की आबादी पर एक चिकित्सक
साढ़े पांच लाख की आबादी वाले जिले में महज 66 ही चिकित्सक हैं। यहां औसतन नौ हजार से अधिक की आबादी पर एक चिकित्सक है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों पर ओपीडी का दबाव रहता है। चिकित्सक मरीजों को कम समय दे पाते हैं। इलाज के लिए रोगियों को बारी का इंतजार करना पड़ता है।

मुख्यालय में जमे 66 में से 31 चिकित्सक
जिले में महज 66 चिकित्सक ही तैनात हैं। जिला अस्पताल, महिला अस्पताल के साथ ही मुख्यालय से सटे स्वास्थ्य केंद्रों में 31 चिकित्सक तैनात हैं। बाकी जिले के लोगों का स्वास्थ्य महज 35 चिकित्सकों के भरोसे है। इनमें से भी अधिकतर चिकित्सक सुगम और अपेक्षाकृत सुविधाजनक स्थलों पर हैं। दूर-दराज के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सक ही नहीं हैं।

जिला मुख्यालय में रोगियों के अधिक दबाव के चलते चिकित्सक ज्यादा हैं। चिकित्सक विहीन स्वास्थ्य केंद्रों पर नियुक्ति का प्रयास किया जा रहा है। रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए महानिदेशालय को प्रस्ताव भेजा गया है। -उषा गुंजियाल, सीएमओ, पिथौरागढ़
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