पिथौरागढ़। तीन तलाक बिल पेश होने के पक्ष में यहां की मुस्लिम महिलाएं नहीं हैं। महिलाओं का कहना है कि यह बिल शरीयत कानून के खिलाफ है। पहाड़ पर मुसलमानों की संख्या वैसे ही कम है और वह अपने परिवारों के साथ ताउम्र खुशी के साथ बिताती आई हैं।
महिलाओं का मानना है कि ऐसे कानून को लाकर पहले से चली आ रही व्यवस्था को कानून के दायरे में बांधना है। यहां की कुछ महिलाएं तो बिल के विरोध में खुलकर बोलती हैं तो कुछ दबी जुबान में समर्थन करती हैं। समर्थन करने वाली महिलाएं सामने आने से कतराती हैं। लखनऊ समेत कई इलाकों में मौलाना इस कानून के विरोध में तीखे बयान दे चुके हैं। इस कारण भी यहां की महिलाएं धारणा बना चुकी हैं।
महिलाओं के उत्थान के कार्यक्रम चलाए सरकार
तिलढुकरी निवासी बुजुर्ग महिला शिराज बेगम का कहना है कि उनकी जिंदगी में कभी भी परिवार के साथ विवाद की नौबत ही नहीं आई। इस तरह के कानून के होने या न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। वह कहती हैं कि मुस्लिम समाज में वर्षों से चली आ रही इस प्रथा को कानून के दायरे में बांधना ठीक नहीं है। सरकार को मुस्लिम महिलाओं के उत्थान के लिए कार्यक्रम चलाने चाहिए।
इस कानून की कोई जरूरत नहीं
पिथौरागढ़ निवासी मोबीन खान का कहना है कि तीन तलाक कानून की जरूरत ही नहीं है। वह कहती हैं कि कोई भी महिला खुले मन से इस कानून का समर्थन नहीं कर सकती। अब समाज बदल रहा है, लोगों का शैक्षिक स्तर बढ़ रहा है। लोग अपने परिवार को संभालने की चिंता खुद करते हैं। वह कहती हैं कि इस कानून से कोई लाभ नहीं होगा। कौन कोर्ट, कचहरी के चक्कर काटता रहेगा।