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पर्यावरण आकलन समिति की रिपोर्ट धोखे का दस्तावेज

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पिथौरागढ़। महाकाली लोक संगठन ने पर्यावरण आकलन समिति द्वारा पंचेश्वर बांध पर तैयार सामाजिक आकलन रिपोर्ट को धोखे का दस्तावेज करार दिया है। संगठन का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस परियोजना के शुरुआत में ही गलत संदेश जा रहा है और प्रभावितों से जनसुनवाई के दौरान सच्चाई को छुपाने का प्रयास किया गया।
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महाकाली लोक संगठन के विमल भाई, सुरेंद्र आर्य, विप्लव भट्ट, सुमित महर, अंजली कुमारी, हरिबल्लभ भट्ट, प्रकाश भंडारी, अनिल कार्की, भीम सिंह रावत और हरेंद्र अवस्थी ने कहा कि 9, 11 और 17 अगस्त को चंपावत, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा में हुई जनसुनवाई में कोई भी बात स्पष्ट नहीं की गई।

कहा है कि एक तरफ सरकार पलायन रोकने के लिए पलायन आयोग का गठन कर चुकी है, दूसरी तरफ बांध निर्माण से 40 हजार परिवारों के सामने विस्थापन का संकट खड़ा हो रहा है। इसके अलावा बांध बनने पर 350 गांव भूस्खलन की चपेट में आ जाएंगे। आज भी बांध प्रभावितों को बांध से संबंधित कागजातों की कोई जानकारी नहीं है।
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पुनर्वास के लिए बनाई गई नीति गांवों में नहीं दी गई है। महाकाली लोक संगठन जितने भी पत्र पर्यावरण आकलन समिति को दे रही है, उनमें से किसी का जवाब नहीं मिल रहा है। यहां तक कि मिलने का समय भी नहीं दिया जा रहा है।

कहा है कि जन संगठनों और प्रभावितों की आवाज को नकार कर पर्यावरण स्वीकृति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना किसी भी दशा में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा है कि इस मुद्दे पर रवि चोपड़ा, दुनू रॉय, डॉ. भरत झुनझुनवाला, मनोज मिश्रा, हिमांशु ठक्कर समेत 45 पर्यावरणविद जल्दी ही केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के सचिव से मुलाकात करेंगे।
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