पिथौरागढ़। ग्रामीण की मौत के मामले की सुनवाई करते हुए जिला सत्र न्यायाधीश शंकर राज ने एक विधि विवादित बालक (वर्तमान में वयस्क) सहित चार अभियुक्तों को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
मामले के अनुसार गंगोलीहाट के नाली गांव निवासी एक व्यक्ति की मई 2017 में मौत हो गई थी। इस मामले में मृतक की पत्नी की ओर से गंगोलीहाट थाने में दूनी निवासी सुरेश सिंह उर्फ सागर, मनोज सिंह, दीपक सुगड़ा उर्फ दिगंबर और एक विधि विवादित बालक के खिलाफ तहरीर दी थी। महिला का आरोप था कि उसके पति के साथ मारपीट कर उन्हें नुवान पिला दिया गया था। इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाने पर डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।
महिला की तहरीर पर आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 452, 323, 504 व 306 के तहत केस दर्ज किया गया। यह मामला जिला सत्र न्यायालय में चला। सत्र न्यायाधीश शंकर राज ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद दोष सिद्ध करते हुए सभी अभियुक्तों को धारा 306 के लिए 10 वर्ष के कठोर कारावास और 50-50 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर प्रत्येक दोषी को दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
धारा 323 सपठित धारा 34 के लिए एक वर्ष का कठोर कारावास और एक-एक हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड नहीं देने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। धारा 452 सपठित धारा 34 के अपराध के लिए सात वर्ष के कठोर कारावास और 20-20 हजार के अर्थदंड से दंडित किया। जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
धारा 504 के लिए एक वर्ष का कारावास और एक-एक हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। जुर्माना न देने पर दो माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। यदि अभियुक्त जुर्माने की राशि जमा करते हैं तो उस धनराशि में से 50 हजार की राशि मृतक की पत्नी भागीरथी देवी उर्फ भावना को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी। मामले की पैरवी राज्य सरकार की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी प्रमोद पंत ने की।