आपदा के समय इस स्थान पर बना झूलापुल बह गया था। सरकार ने नए पुल का निर्माण तो नहीं किया लेकिन दस लाख रुपये खर्च कर गरारी लगा दी। अब यह गरारी भी टूट गई है। गोरी का जल स्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में लोगों के पास आवागमन की कोई व्यवस्था नहीं रह गई है।
गरारी पिछले साल ही लगाई गई थी। दो दिन पहले गरारी का एक हिस्सा टूट गया है। खतरे को देखते हुए लोगों ने गरारी से आवागमन बंद कर दिया है। लोग जान हथेली पर रखकर गोरी को पार कर रहे हैं लेकिन नदी का जल स्तर बढ़ने से ज्यादा दिन तक ऐसा कर पाना संभव नहीं होगा। भारतीय जनता पार्टी ने इस लापरवाही के लिए सरकार और प्रशासन की आलोचना की है। भाजपा जिला प्रवक्ता जगत मर्तोलिया ने जिलाधिकारी के सामने यह मामला रखा और गरारी टूटने के कारणों की जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि एक वर्ष के भीतर ही गरारी का टूटना संदेह पैदा करता है। गरारी के निर्माण में हुए धन खर्च की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा है कि यदि 15 दिन के भीतर रिलकोट और खिलांच के बीच झूलापुल का निर्माण नहीं किया गया तो लोनिवि के दफ्तर में तालाबंदी की जाएगी।