चंपावत। विशेष सत्र न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) की अदालत ने ग्राम पंचायत गुदमी, बनबसा की पूर्व ग्राम प्रधान के साथ अभद्रता के मामले में 10 आरोपियों को दोषी करार देते हुए पांच-पांच साल साल साधारण कारावास और 37-37 हजार का जुर्माना लगाया है। जब अदालत ने फैसला सुनाया तो दोषी पांच महिलाएं फफक-फफक कर रोने लगीं।
विशेष सत्र न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) की अदालत ने दो साल पुराने एससी एसटी एक्ट के मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुनाया। दोषी हेमा खड़ायत (48 वर्ष), लीला दिगारी (45), जानकी कलौनी (50), दिनेश कलौनी (53), रोहित (35), पिंकी उर्फ सारिका (43), निखिल उर्फ अमन (23), संजीव सिंह (45), निर्मला दिगारी (47) और संदीप लॉरेंस (54) सभी निवासी गुदमी, बनबसा को पांच-पांच साल की सजा और बीएनएस की विभिन्न धाराओं में 37-37 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर दोषियों को एक-एक माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अभियोजन पक्ष ने मामले में पांच गवाह और 39 साक्ष्य प्रस्तुत किए जबकि बचाव पक्ष ने एक गवाह प्रस्तुत किया।
वादिनी तत्कालीन प्रधान विनीता राणा ने थाना बनबसा में 11 जुलाई 2024 को तहरीर देकर बताया कि छह से नौ जुलाई, 2024 में आपदा में बनबसा के कई गांव बाढ़ की चपेट में आए थे। 10 जुलाई को सरकारी विभाग से गांव वालों के लिए आई खाद्य सामग्री को बांटने के लिए वो और अन्य कुछ साथियों के साथ गांव पहुंची लेकिन वहां पहुंचने पर हेमा खड़ायत, लीला दिगारी, जानकी कलौनी, दिनेश कलौनी, रोहित, पिंकी, निखिल, संजीव सिंह, निर्मला दिगारी और संदीप लॉरेंस ने ग्रामीणों को उनके खिलाफ भड़काया और उनके साथ गाली-गलौज कर जाति सूचक शब्दों का प्रयोग किया। मारपीट कर उन्हें जूतों की माला पहना दी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने बनबसा थाने में विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। तब से मामला न्यायालय में चल रहा था।