पाबौ। राजकीय महाविद्यालय पाबौ में तनाव प्रबंधन पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में ऑनलाइन माध्यम से भारत के विभिन्न राज्यों राजस्थान, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार आदि प्रतिभागी शामिल हुए। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि युवाओं को रियल लाइफ में जीना चाहिए।
महाविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के मुख्य वक्ता मगध विश्वविद्यालय के डॉ. रविंद्र सिंह ने 21वीं सदी में तकनीकी, सामाजिक और शैक्षिक परिवर्तनों द्वारा उपजे तनाव के बारे में बात रखी। महाविद्यालय पाबौ की प्राध्यापिका डॉ. रजनी बाला द्वारा सभी प्रतिभागियों को कल्पना के माध्यम से प्रकृति का आभास करवाया गया। उन्होंने बताया की किस प्रकार नवाचार के माध्यम से व्यक्ति कुछ समय देकर अपने अंदर विद्यमान प्रतिभा को निखार सकता है।
जीआईसी जगतेश्वर के प्रधानाचार्य नरेंद्र सिंह नेगी ने दिनचर्या पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आज की पीढ़ी को चाहिए कि वह रील लाइफ में न जीकर रियल लाइफ में जीएं। द्वितीय सत्र में तनाव प्रबंधन के सैद्धांतिक पक्ष पर चर्चा हुई। डॉ. सौरभ सिंह ने मनोवैज्ञानिक पहलुओं व तनाव प्रबंधन के उपचारों पर प्रकाश डाला। राजकीय महाविद्यालय मोरी के प्राध्यापक डॉ. कुलदीप द्वारा तनाव को परिभाषित कर अनावश्यक तनाव से बचने के उपाय बताए गए। इस दौरान डॉ. धनेंद्र कुमार, डॉ.सरिता, डॉ. गणेश चंद ने भी विचार रखे।
आर्ट ऑफ़ लिविंग के प्रशिक्षक सुनील पंत ने योग के माध्यम से खेल-खेल में ज्ञान को केंद्रित करने की विधियां सिखाई। संचालन डाॅ. तनुजा रावत व डाॅ. मुकेश शाह ने किया। इस मौके महाविद्यालय पाबौ के प्राचार्य डाॅ. सत्य प्रकाश शर्मा, खिर्सू के प्राचार्य डाॅ. डीएस चौहान, डॉ. रजनी बाला, मोरी उत्तरकाशी के प्राचार्य डॉ. रामकृपाल वर्मा आदि मौजूद रहे।