श्रीनगर। एनआईटी सुमाड़ी परिसर के निर्माण में स्थानीय युवाओं को रोजगार दिए जाने, मालवाहक वाहनों, कैंटीन कार्यों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दिए जाने, बड़े वाहनों के संचालन से क्षतिग्रस्त हो रहे मार्गों का नव निर्माण कराए जाने आदि मांगों को लेकर स्थानीय लोगों की एनआईटी के अधिकारियों के साथ बैठक हुई। इस दौरान लोगों ने एक स्वर में कहा कि यदि उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं दिया गया तो उन्हें एनआईटी परिसर के निर्माण कार्य को बंद करने के लिए विवश होना पड़ेगा।
एनआईटी सुमाड़ी परिसर के निर्माण में खालु, चमराड़ा, नयालगढ़, सुमाड़ी आदि गांवों की भूमि को उपयोग में लाया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने एनआईटी के लिए भूमि दान दी है। जिसके बदले में प्रभावित भूमिधरों को रोजगार व अन्य कार्यों में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इसको लेकर कई बार ग्रामीण शासन-प्रशासन व एनआईटी के अधिकारियों के समक्ष अपनी मांग रख चुके हैं। पूर्व में इन मांगों पर कार्रवाई न होने से नाराज ग्रामीणों ने 18 जनवरी को कार्य बंद कराने की चेतावनी दी थी। जिसको देखते हुए शुक्रवार को एनआईटी के अधिकारियों ने महिला मंगल दल सुमाड़ी, नव युवक मंगल दल व अन्य लोगों के साथ बैठक कर मांगों के संदर्भ में वार्ता की। इस दौरान ग्रामीणों ने कहा कि उनकी मांगों पर बैठक में कोई सकारात्मक आश्वासन नहीं मिला है। जिसके विरोध में वह शनिवार को निर्माण कार्य नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। मौके पर हेमा काला, मनोज भट्ट, अंकित काला, प्रियांशु मुयाल, निखिल मुयाल, अनुज जोशी, राकेश मोहन घिल्डियाल, राजेश मोहन काला, राजमोहन चमोली, सुनीता देवी, सरिता काला, गुड्डी देवी, हेमलता, विपुल आदि मौजूद रहे।
इधर, एनआईटी के कुलसचिव एचएम आजाद ने कहा कि ग्रामीणों के जो मुद्दे थे उन पर सार्थक वार्ता हुई है, उनके मुद्दों पर एनआईटी प्रशासन पूरा सहयोग करेगा।
डाॅ. श्रीकृष्ण उनियाल