श्रीनगर। बछेली के तरुली गांव में शुक्रवार को गुलदार के हमले में महिला की मौत के बाद शनिवार को ग्रामीणों का आक्रोश सड़क पर उतर आया। गुलदार के आतंक से निजात दिलाने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने खंडाह में श्रीनगर-पौड़ी राजमार्ग पर जाम लगा दिया। करीब आधे घंटे तक यातायात बाधित रहने के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने गुलदार को मारने के आदेश की जानकारी दी जिसके बाद ग्रामीण जाम खोलने को तैयार हुए।
मौके पर पहुंचे डीएफओ पौड़ी महातिम यादव, उपजिलाधिकारी श्रीनगर नूपुर वर्मा और पुलिस उपाधीक्षक तपेश कुमार ने ग्रामीणों को समझाया। काफी देर तक ग्रामीणों और प्रशासन के मध्य तीखी नोकझोंक भी हुई। डीएफओ और उपजिलाधिकारी आदेश आने की बात करते रहे लेकिन ग्रामीण नहीं माने। पुलिस उपाधीक्षक तपेश कुमार ने आक्रोशित ग्रामीण महिलाओं को जारी आदेश पढ़कर सुनाया और वन विभाग की ओर से की जा रही कार्रवाई की जानकारी दी। इसके बाद ग्रामीण सड़क से हटने को राजी हुए और यातायात बहाल हो सका। वहीं ग्राम प्रधान कुलदीप गुसाईं ने कहा कि पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी दी जाए।
दो शिकारी तैनात, छह ट्रैप कैमरे और दो पिंजरे लगाए
डीएफओ महातिम यादव ने बताया कि क्षेत्र में वन विभाग की दो टीमें लगातार गश्त कर रही हैं। प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव से गुलदार को पकड़ने और ट्रैंकुलाइज करने के आदेश मिले हैं। यदि इन दोनों विकल्पों से गुलदार को काबू करने में सफलता नहीं मिलती है तो उसे नष्ट करने के आदेश भी दिए गए हैं। इसके लिए क्षेत्र में दो शिकारी तैनात किए गए हैं। गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए छह ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं, जबकि उसे पकड़ने के लिए दो पिंजरे भी लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि पीड़ित परिवार को सरकार की ओर से निर्धारित सहायता राशि का भुगतान कर दिया गया है। डीएफओ ने ग्रामीणों से वन विभाग की कार्रवाई में सहयोग करने की अपील भी की।
घर से 100 मीटर की दूरी पर फिर दिखा गुलदार
बीते शुक्रवार की घटना के बाद गुलदार क्षेत्र में लगातार दिखाई दे रहा है। शनिवार सुबह साढ़े छह बजे भी मृतका बीना देवी के घर के पीछे 100 मीटर की दूर पर गुलदार दिखाई दिया। वन विभाग की टीम के साथ पहुंचे प्रसिद्ध शिकारी जॉय हुकिल ने बताया कि गुलदार शनिवार सुबह भी मृतक बीना देवी के घर के पीछे जंगल में दिखाई दिया।
सोचा था अब मां का सहारा बनूंगा, उससे पहले ही वह चली गईं
गुलदार के हमले में मारी गई महिला के बेटे ने बयां किया दुख
सुधीर रावत
श्रीनगर। सोचा था अब मां का सहारा बनूंगा, उसकी जिंदगीभर की तकलीफें दूर करूंगा लेकिन तकदीर को शायद कुछ और ही मंजूर था। ये शब्द हैं गुलदार के हमले में जान गंवाने वाली बीना देवी के बेटे अरविंद रावत के। मां को खोने का दर्द तो है ही लेकिन उससे भी गहरी टीस इस बात की है कि जीवनभर संघर्ष करने वाली मां को वह सुकून के दिन नहीं दे पाए।
श्रीनगर से करीब 12 किलोमीटर दूर बछेली ग्रामसभा के तरुली गांव में शुक्रवार शाम गुलदार ने बीना देवी को मार दिया था। अरविंद बताते हैं कि जब वह महज डेढ़ से दो माह के थे तभी पिता का साया सिर से उठ गया था। तब मां ने पिता और मां बनकर अकेले ही उसका पालन-पोषण किया।
अरविंद अब एक निजी स्कूल में नौकरी करते हैं। कमाई बहुत अधिक नहीं है लेकिन मां के संघर्ष को करीब से देखने वाले अरविंद के मन में उसके लिए बहुत कुछ करने की चाह थी। मां ने जिन कठिन परिस्थितियों में उनका भविष्य संवारा, अब उसकी जिंदगी को थोड़ा आसान बनाने की बारी उनकी थी लेकिन इससे पहले कि वह छोड़कर चली गई। संवाद