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भवनों के ध्वस्तीकरण को पहुंची टीम पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना के निर्माण के लिए सौड़ गांव में भवनों के ध्वस्तीकरण को पहुँची रेलवे व प्रशासन की टीम को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। काफी देर तक हुई नोंकझोंक के बाद एडीएम के आश्वासन पर ग्रामीण शांत हुए। ग्रामीणों ने कहा कि सौड़ गांव के मुआवजे का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई न्यायालय की अवमानना और ग्रामीणों के साथ अन्याय है।
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शुक्रवार को नगर पालिका देवप्रयाग के सौड़ गाँव में मकानों के ध्वस्तीकरण के लिए आरवीएनएल व प्रशासन की टीम मशीन के साथ पहुँची, जिसका ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया। ग्रामीणों ने रेलवे के वरिष्ठ अभियंता ओपी मालगुडी, तहसीलदार हरिमोहन खंडूरी, कानून गो एमएस रावत, उप राजस्व निरीक्षक राजेश चौधरी व पुलिस से कहा कि मुआवजे का मामला हल हुए बिना मकानों को तोड़ना गलत है। इस दौरान संघर्ष समिति के अध्यक्ष दिनेश टोडरिया के नेतृत्व में ग्रामीण अपने मकानों को घेर कर बैठ गए। बाह बाजार पुलिस को उन्हें हटाने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी। बाद में दूरभाष से एडीएम पौड़ी से ग्रामीणों की वार्ता हुई। एडीएम ने 31 अगस्त को ग्रामीणों की शिकायतों के हल के लिए रेलवे व प्रशासन के उच्च अधिकारियों की बैठक का आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीण शांत हुए। पालिका अध्यक्ष केके कोटियाल ने रेलवे की इस कार्रवाई का कड़ा विरोध करते कहा कि कार्रवाई से पहले ग्रामीणों के साथ बैठक होनी चाहिए थी। समाजसेवी सुधीर मिश्रा ने कहा कि उचित मुआवजे की मांग को लेकर ग्रामीणों द्वारा हाईकोर्ट नैनीताल में याचिका दायर की गयी है। कोर्ट के फैसले से पहले भवनों का ध्वस्तीकरण किया जाना कोर्ट की अवमानना है। विरोध करने वालों में गुलाब सिंह, धन सिंह, कुलवीर, सुमित टोडरिया, दिनेश नेगी, सुरेंद्र, अनिल नेगी, मयंक टोडरिया आदि शामिल थे। संवाद
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