श्रीनगर। नगर के पूर्व पालिका अध्यक्ष विपिन चंद्र मैठाणी व उनकी बहन आशा मैठाणी उपाध्याय के समर्थकों के साथ भाजपा का दामन थामने से नगर निगम चुनाव के समीकरणों में उलटफेर हो गया है। इससे पूर्व में तैयारी कर रहे दावेदारों की बेचैनी बढ़ गई है। आशा 2019 में निर्दलीय तौर पर नगर पालिका अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ चुकी हैं।
देहरादून में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट व कैबिनेट मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत की मौजूदगी में उन्हें भाजपा में शामिल कराया गया। विपिन 2013-18 में निर्दलीय जीतकर नगर पालिका श्रीनगर के अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। उनके भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी से मेयर प्रत्याशी बनने का सपना देख रहे दावेदारों में खलबली मच गई है। मेयर के लिए यहां से करीब 6 से अधिक महिलाओं की दावेदारी थी। इनमें वह दावेदार भी शामिल थे, जो सामान्य सीट पर करीब तीन वर्षों से तैयारी कर रहे थे, महिला सीट होने पर परिजनों के नाम पर पुन: उनकी दावेदारी थी।
आशा का टिकट फाइनल होने पर हो सकती है बगावत
आशा मैठाणी का भाजपा से मेयर का टिकट फाइनल होेते ही पार्टी के दावेदार बगावत कर सकते हैं। चर्चाएं हैं कि यदि ऐसा होता है तो लंबे समय से तैयारी कर रहे दावेदार निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। पार्टी के अंदर उन्हें पैराशूट दावेदार के रूप में समझा जा रहा है। इसके अलावा पूर्व पालिका अध्यक्ष पूनम तिवाड़ी भी निर्दलीय तौर पर चुनाव तैयारी में जुटी हुई हैं। यदि बगावत के स्वर तेज होते हैं और निर्दलीय तौर पर मजबूत दावेदार मैदान में उतरते हैं तो भाजपा व कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।