भगवान सूर्य के धनुराशि में प्रवेश करने के साथ ही संगम नगरी स्थित प्राचीन श्रीरघुनाथ मंदिर में परंपरागत ढंग से महापूजा की शुरुआत की गई है। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने सोमवार को भगवान श्रीराम के बाल्य लीला से लेकर लंकापति रावण के मारे जाने की सारी लीलाओं का लयबद्ध तरीके से गायन किया। मंदिर के मुख्य पुजारी सोमनाथ भट्ट ने कहा कि अखंड महापूजा पूरे महीने चलेगी। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम की तपोस्थली देवप्रयाग में करीब दो सौ वर्षों से तीर्थ पुरोहित समाज के लोग पौष माह में भगवान श्रीराम की अखंड महापूजा करते आ रहे है। यह महापूजा सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने के साथ शुरू होकर मकर संक्रांति के एक दिन पहले तक आयोजित की जाती है। इस दौरान पूरे महीने भगवान को रेवड़ी और उड़द की खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। वहीं भगवान को हर दिन के रंगों के अनुसार वस्त्र पहनाए जाते है। इस अवसर पर सारे श्रद्धालु विशेष शैली और मृदंग की थाप पर जय राम जी की जय जय मंगल आरती व कौशल्या प्यारे रामको गोद खिलाए जैसे भजनों का गायन करते है। हर दिन सुबह एक घंटे की महापूजा के बाद रेवड़ी और खिचड़ी का प्रसाद वितरित करने के बाद मंदिर के कपाट सुबह 9 बजे बंद किए जाते है। उसके बाद शाम 3 बजे मंदिर के कपाट दर्शनों के लिए खुलते है।