पौड़ी। गढ़वाल केंद्रीय विवि के डॉ. बीजीआर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड की जैव विविधता को बचाने के लिए वैज्ञानिक शोध की पैरवी की गई। विषय विशेषज्ञों ने प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाने हुए सतत विकास को समाज के लिए जरूरी बताया।बीजीआर परिसर के वनस्पति विज्ञान विभाग सभागार में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय राष्ट्रीय युवा विज्ञान अकादमी नई दिल्ली और जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान के गढ़वाल क्षेत्रीय केंद्र (श्रीनगर) के संयुक्त पहल पर आयोजित कार्यक्रम में शिक्षाविदों ने छात्रों को उत्तराखंड की जैव विविधता पर विस्तार से जानकारियां दीं। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पूर्व परिसर निदेशक प्रो. पीपी बडोनी ने उत्तराखंड की जैव विविधता को राज्य की मुख्य धरोहर बताया। उन्होंने शोध छात्रों को इस पर वैज्ञानिक शोध के लिए प्रेरित किया। मुख्य वक्ता डॉ. के शेखर ने उत्तराखंड के विकास में प्रकृति और जैव विविधता पर सामंजस्य बैठाकर कार्य करने को कहा। एचओडी वनस्पति विज्ञान डॉ. विक्रम सिंह नेगी ने मानवीय हस्तक्षेप से जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावाें की वैज्ञानिक दृष्टिकोण से रोशनी डाली।