ऋषिगंगा जलप्रलय में लापता हुए लोगों की तलाश के लिए श्रीनगर जल विद्युत परियोजना झील/अलकनंदा नदी में खोज अभियान जारी रहा। लापता लोगों की तलाश में सोनार तकनीकी से भी कोई मदद नहीं मिल पाई।
ऋषिगंगा में आई बाढ़ से मची तबाही के बाद 8 फरवरी से श्रीनगर से रुद्रप्रयाग के बीच एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन विभाग की टीम लापता लोगों की तलाश कर रही हैं। 10 फरवरी से नेवी कमांडो भी झील/नदी में तलाशी मेें जुटे हुए हैं। अब तक एसडीआरएफ और कीर्तिनगर पुलिस को अलकनंदा नदी में दो शव मिले हैं, लेकिन उनकी शिनाख्त नहीं हो पाई है। एसडीएम रविंद्र बिष्ट ने बताया कि लापता लोगों की तलाश के लिए सोनार (साउंड नेवीगेशन एंड रेंगिंग) तकनीकी की मदद ली जा रही है। सोनार ने दो-तीन स्थानों पर नदी तल में कुछ होने के संकेत दिए। जिस पर नेवी के गोताखोरों ने पानी में गोता लगाया। लेकिन कुछ नहीं मिला। इधर, विगत 8 फरवरी को सिरोबगड़ के समीप अलकनंदा नदी में मिले शव का दाह संस्कार कर दिया गया। चौकी प्रभारी श्रीकोट एसआई अजय कुमार ने बताया कि शव को शिनाख्त के लिए 72 घंटे मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में रखा गया था। लेकिन उसकी पहचान नहीं हो पाई। जिसके चलते शव का पोस्टमार्टम करने के बाद दाह संस्कार कर दिया गया।