नई शिक्षा नीति के स्वरूप को देखकर लगता है कि फिर से संस्कृत के पुराने दिन लौट आएंगे। शिक्षा नीति-2020 में इस भाषा को विशेष महत्व दिया गया है। यह बातें गुरुकुल कांगड़ी, हरिद्वार के कुलपति प्रो. रूपकिशोर शास्त्री ने केंद्रीय संस्कृत विवि के श्रीरघुनाथ कीर्ति परिसर में आयोजित संस्कृत सप्ताह के वेबिनार में कही।
संस्कृत की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रो. शास्त्री ने चेताया कि किसी भाषा को बोलने वालों की संख्या 10 हजार से कम हो जाए तो वह भाषा संवैधानिक लाभ से वंचित हो जाती है। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों के अलावा मंदिरों, मठों और तीर्थस्थलों पर भी संस्कृत बोली जाती है, लेकिन उसके आंकड़े प्रकाश में नहीं आ पाते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए निदेशक प्रो. केबी. सुब्बरायुडू ने कहा कि भारत में जितनी भी मातृभाषाएं हैं, सभी में संस्कृत का अंश है। ओम शर्मा और डा. अनिलकुमार ने मंगलाचरण किया, जबकि प्रो. बनमाली बिश्वाल ने स्वागत भाषण दिया। वेबिनार में कार्यक्रम संयोजक डा. सच्चिदानंद स्नेही, डा. आर बालमुरुगन, डा. शैलेंद्र प्रसाद उनियाल, डा. कृपाशंकर शर्मा, डा. दिनेशचंद्र पांडे, डा. वीरेंद्र बर्तवाल, डा. सुरेश शर्मा, डा. अवधेश बिजल्वाण, पंकज कोटियाल, डा. युवराज शर्मा, नवीन डोबरियाल आदि मौजूद थे।
सप्ताहभर होने वाले वेबिनार के कार्यक्रम
देवप्रयाग। महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. शैलेंद्र नारायण कोटियाल ने बताया कि संस्कृत सप्ताह के तहत ऑनलाइन विभिन्न कार्यक्रम होंगे। इनमें सस्वरवेदपाठ, ऋषिपूजन, काव्यपाठ, निबंधलेखन प्रतियोगिता, शिक्षकों की ओर से व्याख्यान आदि मुख्य हैं। निबंध प्रतियोगिता में प्रथम तीन स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों को ऑनलाइन प्रमाणपत्र दिए जाएंगे।