अस्पतालों में आ रहे हर वर्ष आ रहे कई मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। तंबाकू, गुटखा और बीड़ी-सिगरेट के सेवन से मुंह का कैंसर तेजी से बढ़ रहा है। राजकीय संयुक्त उपजिला अस्पताल में हर साल 5 से 6 जबकि बेस अस्पताल में 40 से 50 मरीज इसके इलाज के लिए पहुच रहे हैं जिनमें 35 से 60 वर्ष के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
राजकीय संयुक्त उपजिला अस्पताल के ईएनटी सर्जन डॉ. दिग्पाल दत्त का कहना है कि तंबाकू और गुटके के सेवन की आदत अक्सर युवावस्था में पड़ जाती है जबकि इसके गंभीर लक्षण कई साल बाद सामने आ सकते हैं। मुंह के अंदर सफेद चकत्ते बनने की स्थिति को ल्यूकोप्लेकिया कहा जाता है। ऐसे चकत्ते सामान्य रूप से रगड़ने से साफ नहीं होते। यह स्थिति कुछ मामलों में कैंसर का खतरा बढ़ा सकती है, इसलिए इसकी जांच जरूरी है। मुंह कम खुलना और 2-3 हफ्ते से अधिक समय तक छाले या घाव बने रहना कैंसर के खतरे की घंटी हैं। वहीं बेस अस्पताल के सीनियर रेजिडेंट (ईएनटी) डॉ. शुभम वर्मा ने बताया कि यहां आने वाले अधिकांश मरीजों का इलाज छोटी सर्जरी से सफल हो जाता है। वर्तमान में चार मरीजों का इलाज चल रहा है जिनमें से दो को हायर सेंटर रेफर किया गया है और दो की बायोप्सी बेस अस्पताल में ही की जा रही है।