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शिक्षा नीति में क्षेत्रीय भाषाओं का भी रखा जाए ध्यान

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गढुवाल विवि श्रीनगर के एसीएल हाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रारुप पर आयोजित सेमीनार में बोल? - फोटो : SHRINAGAR
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2019 के प्रारूप पर चर्चा करने के लिए गढ़वाल विवि में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में विवि के तीनों कैंपस (श्रीनगर, पौड़ी व टिहरी) के शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान शिक्षा नीति में क्षेत्रीय भाषाओं का भी ध्यान रखे जाने पर जोर दिया गया।
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मंगलवार को गढ़वाल विवि के बिड़ला परिसर स्थित एसीएल हॉल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रारूप पर चर्चा की गयी। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जवाहर लाल नेहरू विवि दिल्ली प्रो. केपे विजयलक्ष्मी ने प्रारूप की चुनौतियों के बारे में बताया। गढ़वाल विवि की कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने कहा कि भौगोलिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में स्थित उच्च शिक्षण संस्थानों के समक्ष काफी चुनौतियां हैं। यहां सबसे बड़ी चुनौती शिक्षकों को रोक कर रखना है।
इस अवसर पर बताया गया कि शिक्षा नीति के प्रारूप के संबंध में विवि के विभिन्न विभागों में संगोष्ठियों का आयोजन किया गया, जिनमें सुझाव लिए गए। यह सुझाव संकलित कर एमएचआरडी भेजे जाएंगे। डा. सीमा धवन ने शिक्षा नीति के प्रारूप के बारे में विस्तार से बताया। प्रो. पीके जोशी ने विद्यालयी शिक्षा पर विचार रखते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में भोजन के बजाय पढ़ाने पर ज्यादा जोर देना होगा। छोटे बच्चों पर कक्षाओं में बैठने का बोझ न डाला जाए। बीआरजी कैंपस पौड़ी के प्रो. जेके गोदियाल ने क्षेत्रीय भाषाओं पर भी जोर दिए जाने की पैरवी की। इस मौके पर प्रो. एससी बागड़ी , एसआरटी कैंपस टिहरी के निदेशक प्रो. बौड़ाई, प्रो.एसएस नेगी, डा. ममता आर्य, डा. प्रशांत कंडारी व डा. जेपी भट्ट आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन डा. आलोक सागर गौतम ने किया।
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