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कोरोना संदिग्ध के सैंपल लेने के बाद हो जाते हैं क्वारंटीन

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राजकीय मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के 8 संविदा लैब तकनीशियन कोरोना योद्धा के तौर पर काम कर रहे हैं। वे कोरोना संदिग्ध नमूने लेने के बाद तब तक क्वारंटीन में रहते हैं जब तक लैब से रिजल्ट न आ जाए।
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श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में 10 लैब तकनीशियन हैं जिसमें से आठ कर्मी अनिल सेमवाल, सुधीर डिमरी, सुनील रतूड़ी, जयवीर, अमित मनवाल, अजय उनियाल, आशुतोष मलासी और सुशील कुमार संविदा पर तैनात हैं। ये कर्मचारी 10 सालों से संस्थान में संविदा पर नौकरी कर रहे हैं। इतनी लंबी अवधि बीत जाने के बाद भी सरकार न तो इनको नियमित कर पाई और ना ही इनके संबंध में कोई ठोस फैसला ले पाई। अब कोरोना महामारी में ये महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज को कोविड-19 अस्पताल बनाए जाने के बाद उक्त कर्मचारी यहां भर्ती हो रहे मरीजों सैंपल ले रहे हैं। लैब तकनीशियन अनिल सेमवाल और अमित मनवाल बताते हैं कि मरीज का नाक या गले से सैंपल लेते समय वह खांसता है तो ऐसे में संक्रमण का डर रहता है। इसलिए पीपीई किट पहनकर पूरी सुरक्षा के साथ सैंपल लिया जाता है। सैंपल लेने के बाद तब तक क्वारंटीन रहते हैं, जब तक मरीज की रिपोर्ट नहीं आ जाती।
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